मुजफ्फरपुर में दुर्गा पूजा की धूम, 501 डमरू और 101 शिवलिंग वाला दरबार बना आकर्षण
बिहार के मुजफ्फरपुर में दुर्गा पूजा 2026 के दौरान भव्य पूजा पंडाल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। मुजफ्फरपुर दुर्गा पूजा में इस बार कहीं 501 डमरू और 101 शिवलिंग से सजा मां दुर्गा का दरबार नजर आ रहा है, तो कहीं 21 किलो ड्राई फ्रूट्स से तैयार मुकुट भक्तों का ध्यान खींच रहा है। शहर के अलग-अलग इलाकों में पुरी के जगन्नाथ मंदिर, गुजरात के अक्षरधाम मंदिर और नेपाल के मनोकामना देवी मंदिर जैसी प्रसिद्ध धार्मिक संरचनाओं की थीम पर पंडाल तैयार किए गए हैं। आकर्षक सजावट, विशाल प्रवेश द्वार और रंगीन रोशनी ने त्योहार की रौनक बढ़ा दी है।
501 डमरू और 101 शिवलिंग से सजा मां दुर्गा का दरबार
मुजफ्फरपुर के छाता बाजार स्थित परती टोला में शिव मंदिर दुर्गा पूजा समिति ने इस बार अनोखी धार्मिक सजावट की है। यहां मां दुर्गा का दरबार 101 शिवलिंग और 501 डमरू से सजाया गया है।
कोलकाता से आए कारीगरों ने पंडाल को भव्य रूप दिया है। शिव और शक्ति के प्रतीकों से सजे इस दरबार को देखने के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। समिति यहां पिछले 45 वर्षों से दुर्गा पूजा का आयोजन करती आ रही है।
इस पंडाल की खासियत इसकी धार्मिक थीम और प्रतीकों की अनूठी सजावट है। यही वजह है कि यह शहर के चर्चित पूजा स्थलों में शामिल है।
मोतीझील में 21 किलो ड्राई फ्रूट्स का मुकुट बना आकर्षण
मोतीझील में दुर्गा पूजा समिति ने महाराष्ट्र के केदारेश्वर गुफा की थीम पर पंडाल तैयार किया है। इसकी बनावट ऐसी रखी गई है कि श्रद्धालु गुफा जैसे प्रवेश मार्ग से गुजरकर मां दुर्गा के दर्शन कर सकें।
यहां स्थापित 21 किलो ड्राई फ्रूट्स से तैयार मुकुट विशेष आकर्षण का केंद्र है। इसकी अनुमानित लागत करीब 51 हजार रुपये बताई गई है। पंडाल में शिव-शक्ति की अवधारणा को भी दर्शाया गया है।
आयोजन को व्यवस्थित बनाने के लिए 11 सीसीटीवी कैमरे, अग्निशमन व्यवस्था और 51 स्वयंसेवकों की तैनाती की तैयारी की गई है। इससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर ध्यान दिया जा रहा है।
रामदयालु में दिखेगी पुरी के जगन्नाथ मंदिर की झलक
रामदयालु इलाके में ओडिशा के पुरी स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर की वास्तुकला से प्रेरित पूजा पंडाल बनाया गया है। पंडाल के माध्यम से मंदिर के धार्मिक स्वरूप और स्थापत्य शैली को प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया है।
आकर्षक रोशनी और सजावट के बीच यह पंडाल भक्तों को अपनी ओर खींच रहा है। धार्मिक स्थलों की थीम पर आधारित ऐसे पंडाल श्रद्धालुओं को पूजा के साथ देश की सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत की झलक भी दिखाते हैं।
जूरन छपरा में 71 फीट ऊंचा अक्षरधाम थीम वाला पंडाल
जूरन छपरा स्थित महेश बाबू चौक माई मंदिर में करीब 71 फीट ऊंचा भव्य पंडाल तैयार किया गया है। इसका मुख्य प्रवेश द्वार गुजरात के प्रसिद्ध अक्षरधाम मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है।
पंडाल की ऊंचाई और सजावट इसे खास बनाती है। यहां मां दुर्गा की 12 फीट ऊंची वैष्णवी प्रतिमा स्थापित की गई है। मंदिर परिसर को रंगीन रोशनी और आकर्षक तोरण द्वारों से सजाया गया है।
श्रद्धालुओं के लिए महाआरती, पुष्पांजलि और महाप्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की गई है। भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए महिला और पुरुषों की अलग-अलग कतारें बनाई गई हैं। सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों से निगरानी और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है।
नाजिरपुर में 400 साल पुराने वन देवी मंदिर की थीम
नाजिरपुर स्थित आस्था परिषद का पूजा पंडाल इस बार विहटा के करीब 400 वर्ष पुराने वन देवी माता मंदिर की थीम पर बनाया गया है। इसका मुख्य प्रवेश द्वार लगभग 40 फीट ऊंचा है, जबकि अंदर मां दुर्गा की 12 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है।
पंडाल के भीतर पहाड़, घने जंगल और पेड़-पौधों की सजावट से प्राकृतिक वातावरण तैयार किया गया है। यहां मां दुर्गा को रथ पर सवार होकर महिषासुर का वध करते हुए दर्शाया गया है।
धार्मिक कथा और प्रकृति के मेल से तैयार यह पंडाल श्रद्धालुओं के लिए एक अलग अनुभव प्रस्तुत करता है।
अखाड़ाघाट में नेपाल के मनोकामना देवी मंदिर जैसी भव्यता
अखाड़ाघाट में नेपाल के प्रसिद्ध मां मनोकामना देवी मंदिर की तर्ज पर भव्य पूजा पंडाल बनाया गया है। इसका मुख्य प्रवेश द्वार करीब 85 फीट ऊंचा है। यहां मां दुर्गा की 18 फीट ऊंची प्रतिमा और भगवान शिव की 14 फीट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित की गई है।
समिति अध्यक्ष राणा आलोक सिंह के अनुसार, यहां दुर्गा पूजा का यह 15वां वर्ष है। पंडाल का निर्माण बंगाल के कारीगरों ने किया है। मंदिर की शैली और विशाल प्रतिमाएं इसे खास बनाती हैं।
श्रद्धालुओं के लिए यह पंडाल धार्मिक आस्था के साथ आकर्षक सजावट देखने का अवसर भी प्रदान करता है।
मुजफ्फरपुर के पूजा पंडालों में सुरक्षा और व्यवस्था पर जोर
दुर्गा पूजा के दौरान बड़े पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। ऐसे में कतारों का प्रबंधन, अग्निशमन व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और स्वयंसेवकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
शहर के विभिन्न पूजा आयोजनों में सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इंतजाम किए गए हैं। दर्शन के लिए पहुंचने वाले लोगों को समिति के निर्देशों का पालन करना चाहिए और भीड़ के बीच धैर्य बनाए रखना चाहिए।
इस बार मुजफ्फरपुर के पूजा पंडालों में धार्मिक परंपरा, विशाल संरचनाओं और रचनात्मक सजावट का अनूठा मेल देखने को मिल रहा है। 501 डमरू और 101 शिवलिंग वाला दरबार, ड्राई फ्रूट्स का मुकुट और देश-विदेश के मंदिरों की थीम ने दुर्गा पूजा की रौनक बढ़ा दी है।

