पंजाब में नशा तस्करी के खिलाफ आवाज उठाने वाले बिक्रमजीत के परिवार से मिले अमित शाह
पंजाब में नशा तस्करी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार, 20 अक्टूबर को गुरदासपुर में बिक्रमजीत सिंह के घर पहुंचकर उनके परिवार से मुलाकात की। बिक्रमजीत की कथित तौर पर नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने के बाद हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने राज्य में कानून-व्यवस्था और नशा तस्करी पर नियंत्रण को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
अमित शाह का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब पंजाब के अलग-अलग जिलों में नशे के कारोबार का विरोध करने वाले लोगों पर कथित हमलों और हत्याओं को लेकर चिंता बढ़ रही है। गृह मंत्री के कार्यक्रम में गुरदासपुर के अलावा मानसा और संगरूर में प्रभावित परिवारों से मुलाकात भी शामिल है।
अमित शाह के दौरे से नशे के खिलाफ कार्रवाई का संदेश
पंजाब भाजपा के उपाध्यक्ष फतेहजंग सिंह बाजवा ने अमित शाह के दौरे को नशे के खिलाफ पार्टी की प्रतिबद्धता से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि जालंधर में भाजपा ने पंजाब से नशे की समस्या खत्म करने का वादा किया था। पार्टी का लक्ष्य 31 दिसंबर 2029 तक राज्य को नशामुक्त बनाना है।
बाजवा के मुताबिक, नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की मौत की घटनाओं के बीच गृह मंत्री की पीड़ित परिवारों से मुलाकात एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। भाजपा का कहना है कि वह अपने वादे को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इससे पहले अमित शाह ने नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ बोलने वाले लोगों की मौत पर दुख जताया था। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा था कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को चुप कराने की कोशिश सफल नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार नशा तस्करों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाने के लिए काम करेगी।
बिक्रमजीत सिंह की हत्या पर केंद्र ने मांगी रिपोर्ट
गृह मंत्रालय ने गुरदासपुर में बिक्रमजीत सिंह की हत्या और कथित हमले में घायल हुए दो अन्य लोगों, निशान सिंह तथा गुरमुख सिंह, के मामले में पंजाब सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय ने पंजाब के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर घटना के तथ्यों और राज्य सरकार की ओर से की गई कार्रवाई का विवरण देने को कहा है।
पत्र में बटाला तहसील के श्री हरगोबिंदपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत मारी पनवां गांव में हुई घटना का उल्लेख किया गया है। केंद्र ने मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परमिंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में भी तथ्यात्मक रिपोर्ट और आगे उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है।
गृह मंत्रालय ने नशे के खिलाफ अभियान को प्रभावी बनाने के लिए एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स को मजबूत करने, नशे से जुड़े मामलों में वित्तीय जांच करने, नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर के जरिए समन्वय बढ़ाने और अभियोजन प्रक्रिया को बेहतर बनाने जैसे उपायों पर भी जानकारी मांगी है। इसके अलावा एनडीपीएस कानून के तहत अदालतों को मजबूत करने तथा अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया गया है।
झोटा हत्याकांड पर सियासत, CBI जांच का फैसला
मानसा जिले के नशा विरोधी कार्यकर्ता परमिंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बताया गया कि नशीले पदार्थों की बिक्री को लेकर एक मेडिकल स्टोर संचालक के साथ विवाद के दौरान उन्हें गोली लगी। अस्पताल ले जाए जाने के बाद उनकी मौत हो गई। घटना के विरोध में किसान और मजदूर संगठनों ने 15 अक्टूबर को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया था।
पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने अमित शाह के दौरे का स्वागत किया, लेकिन सीमा सुरक्षा और नशे की तस्करी को लेकर केंद्र से सवाल भी पूछे। उन्होंने गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह के रास्ते कथित तौर पर 3,000 किलोग्राम हेरोइन आने का मुद्दा उठाया और पाकिस्तान से लगी पंजाब की 543 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा पर चिंता जताई।
अरोड़ा ने झोटा हत्याकांड की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की जानकारी दी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी परिवार की मांग के बाद मामले की जांच सीबीआई को देने की घोषणा की है।
पंजाब में नशे के मुद्दे पर भाजपा और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं। भाजपा राज्य सरकार पर नशा तस्करी रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाती रही है, जबकि पंजाब सरकार ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। ऐसे में बिक्रमजीत सिंह और झोटा से जुड़े मामलों की जांच तथा नशा तस्करी रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर सबकी नजर रहेगी।

