ओम प्रकाश माथुर बने केरलम के नए राज्यपाल, जानिए उनका राजनीतिक सफर
तिरुवनंतपुरम: ओम प्रकाश माथुर ने गुरुवार, 22 अक्टूबर को केरलम के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। तिरुवनंतपुरम स्थित लोक भवन के सभागार में आयोजित समारोह में केरलम हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सौमेन सेन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। माथुर इससे पहले सिक्किम के राज्यपाल की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनके नए पदभार ग्रहण करने के साथ ही केरलम के संवैधानिक नेतृत्व में बदलाव हुआ है।
शपथ ग्रहण समारोह में राज्य के मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। राजनीतिक नेताओं ने माथुर की नियुक्ति का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि उनके अनुभव से राज्य को लाभ मिलेगा।
राजस्थान से केरलम तक, कैसा रहा ओम प्रकाश माथुर का सफर?
ओम प्रकाश माथुर राजस्थान के पाली जिले के बाली क्षेत्र स्थित बेड़ल गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की। सार्वजनिक जीवन में उनकी शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचारक के रूप में हुई थी। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में कई महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं।
माथुर राजस्थान बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और गुजरात के प्रभारी महासचिव जैसे पदों पर रह चुके हैं। पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने संगठन से जुड़े कई दायित्व निभाए। इसके अलावा, वह राजस्थान से दो कार्यकाल तक राज्यसभा के सदस्य रहे। विभिन्न राज्यों में चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने के कारण उन्हें संगठन और चुनावी रणनीति का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ।
बाद में उन्हें सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया। वहां अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद अब उन्होंने केरलम के राज्यपाल के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। उनके राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव को इस नियुक्ति का एक महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है।
कांग्रेस और बीजेपी नेताओं ने क्या कहा?
केरलम के मंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ ने शपथ ग्रहण समारोह को खुशी का अवसर बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मंत्री और विधायक बड़ी संख्या में समारोह में शामिल हुए। जोसेफ ने नए राज्यपाल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि उनका कार्यकाल राज्य के लिए सकारात्मक रहेगा।
वहीं, राजस्थान के मंत्री संजय शर्मा ने माथुर की नियुक्ति को राज्य के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि माथुर ने बीजेपी में प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं। दो बार राज्यसभा सदस्य रहने के साथ-साथ उन्होंने कई राज्यों में पार्टी के चुनावी प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जयपुर दक्षिण के बीजेपी जिला अध्यक्ष राजेश गुर्जर ने भी माथुर के संगठनात्मक अनुभव की सराहना की। उनके अनुसार, माथुर ने अलग-अलग पदों पर रहते हुए संगठन को मजबूत करने और नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। राजस्थान के नेताओं ने उनके नए दायित्व के लिए शुभकामनाएं दीं।
राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की जगह संभाली जिम्मेदारी
ओम प्रकाश माथुर ने राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की जगह केरलम के राज्यपाल का पद संभाला है। आर्लेकर का तबादला तमिलनाडु के राज्यपाल के रूप में किया गया है। इस बदलाव के साथ दोनों राज्यों के राज्यपाल पदों पर नई जिम्मेदारियों का निर्धारण हुआ है।
इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विभिन्न राज्यों में राज्यपालों की नियुक्तियों और तबादलों से संबंधित बदलावों की घोषणा की थी। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, सुधा यादव को कर्नाटक, धाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड, ब्रज मोहन राम को ओडिशा और दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
राज्यपाल राज्य में संवैधानिक प्रमुख की भूमिका निभाते हैं। ऐसे में माथुर के सामने केरलम में इस संवैधानिक जिम्मेदारी का निर्वहन करने की चुनौती होगी। उनके अनुभव और नई भूमिका को लेकर राजनीतिक हलकों में उम्मीदें जताई जा रही हैं।

