अरुणाचल सीमा पर चीनी घुसपैठ की खबरों से गरमाई सियासत, ओवैसी ने मांगा जवाब
अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा की स्थिति को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार से चीनी सैनिकों की कथित घुसपैठ और भारतीय गश्ती दलों तथा नागरिकों को रोके जाने से जुड़ी खबरों पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की है। उन्होंने इस मामले में संसद का विशेष सत्र बुलाने की भी अपील की।
ओवैसी का कहना है कि देश की सीमाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर सरकार को पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक की कथित टिप्पणियों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि सीमा पर वास्तव में क्या स्थिति है और सरकार इस पर देश को विस्तार से जानकारी क्यों नहीं दे रही है।
चीनी सैनिकों की गतिविधियों पर ओवैसी ने पूछे सवाल
ओवैसी ने केंद्र सरकार से पूछा कि अरुणाचल प्रदेश में कितने स्थानों पर चीनी सैनिकों की कथित घुसपैठ की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या भारतीय गश्ती दलों और स्थानीय नागरिकों को कुछ इलाकों में जाने से रोका गया है और क्या चीनी सैनिकों ने वहां से पीछे हटने से इनकार किया है।
AIMIM प्रमुख ने इन सवालों के साथ यह भी पूछा कि कथित घटनाक्रम कितने समय से जारी है। उनके मुताबिक, सीमा पर ऐसी किसी भी स्थिति के बारे में देश को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर पहले भी सवाल उठाए गए, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
ओवैसी ने सरकार की चीन नीति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने जून 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से चीन की मौजूदगी को लेकर दिए गए बयान का उल्लेख करते हुए पूछा कि बाद की खबरों और घटनाक्रम के संदर्भ में उस बयान को कैसे समझा जाए। हालांकि, सीमा पर घुसपैठ और भारतीय क्षेत्र में गतिविधियों से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग
ओवैसी ने कहा कि सीमा की स्थिति पर संसद में विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से एक व्यापक और स्वतंत्र रिपोर्ट जारी करने की मांग की, जिसमें सीमा पर कथित घटनाओं, भारतीय गश्त की स्थिति और चीन के साथ बातचीत की जानकारी शामिल हो।
उनका तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मामलों में पारदर्शिता तथा राजनीतिक जवाबदेही जरूरी है। इसी आधार पर उन्होंने संसद का विशेष सत्र बुलाकर चीन के साथ सीमा विवाद और केंद्र सरकार की नीति पर चर्चा कराने की मांग की।
इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस उस समय और तेज हुई, जब ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर की कथित टिप्पणियों को लेकर सवाल उठने लगे। इन टिप्पणियों में अरुणाचल प्रदेश में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ जारी आमने-सामने की स्थितियों का जिक्र किए जाने की खबरें सामने आई थीं।
विदेश मंत्रालय ने सीमा विवाद पर क्या कहा?
विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विशिष्ट घटनाक्रम से जुड़ी जानकारी के लिए रक्षा मंत्रालय से संपर्क किया जाना चाहिए। मंत्रालय के अनुसार, भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में कभी-कभी उस समय तनाव पैदा होता है, जब चीनी सेनाएं स्थापित गश्त के तरीकों से अलग गतिविधियां करती हैं।
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि दोनों देश लंबित मुद्दों को सुलझाने और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गलतफहमी या गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा कूटनीतिक और सैन्य व्यवस्थाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। बेहतर सीमा प्रबंधन के लिए LAC की समझ को मजबूत करने के उपायों पर भी चर्चा करने की सहमति बनी है।
मंत्रालय ने जोर दिया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना भारत-चीन संबंधों के समग्र विकास के लिए जरूरी है। ऐसे में अब इस मुद्दे पर सरकार की ओर से आगे क्या जानकारी दी जाती है और संसद में चर्चा की मांग पर क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर नजर रहेगी।

