यूपी चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस का बड़ा दांव, 200 सीटों के पोस्टर से सियासी हलचल
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सीट बंटवारे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। लखनऊ में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (UPCC) मुख्यालय के बाहर लगे एक पोस्टर ने इस बहस को और चर्चा में ला दिया है। पोस्टर पर बड़े अक्षरों में लिखा है, “200 सीट हक है हमारा।” इसमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की तस्वीरें भी दिखाई गई हैं।
यह पोस्टर ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सपा के सामने करीब 175 से 200 सीटों की शुरुआती सूची रखी है। दोनों दल विपक्षी INDIA गठबंधन के सहयोगी हैं और चुनाव में साथ उतरने की संभावना पर बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, सीटों की संख्या और उम्मीदवारों के चयन को लेकर अंतिम सहमति अभी नहीं बनी है।
लखनऊ में पोस्टर से कांग्रेस ने दिया बड़ा संदेश
लखनऊ में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर लगे पोस्टर को पार्टी कार्यकर्ताओं की उस मांग के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें वे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को अधिक सीटें मिलने की पैरवी कर रहे हैं। पोस्टर पर लिखा नारा पार्टी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को सामने रखता है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। ऐसे में 200 सीटों पर दावा करना कांग्रेस के लिए गठबंधन में बड़ी हिस्सेदारी की मांग के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, पोस्टर पर लिखे नारे को सीट बंटवारे का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। वास्तविक समझौता दोनों दलों के नेतृत्व के बीच बातचीत के बाद ही तय होगा।
कांग्रेस का मानना है कि संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और पिछले लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को सीटों की मांग तय करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।
2024 के लोकसभा चुनाव ने बढ़ाया कांग्रेस का भरोसा
कांग्रेस की इस मांग के पीछे 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों को भी अहम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा ने मिलकर चुनाव लड़ा था। राज्य की 80 लोकसभा सीटों में सपा ने 37 और कांग्रेस ने छह सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस तरह दोनों दलों के खाते में कुल 43 सीटें आई थीं।
इन नतीजों के बाद कांग्रेस के भीतर राज्य में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने और संगठन को मजबूत करने की उम्मीद बढ़ी है। पार्टी अब विधानसभा चुनाव में भी अपनी भूमिका को अधिक प्रभावी बनाना चाहती है।
रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस ने अपनी सीटों की प्राथमिकता तय करने के लिए निर्वाचन क्षेत्रों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटने की प्रक्रिया अपनाई है। इसमें संगठन की स्थिति और चुनावी संभावनाओं जैसे पहलुओं को आधार बनाया गया है। पार्टी की ओर से सपा को सौंपी गई सूची बातचीत की शुरुआती रूपरेखा है, न कि सीटों का अंतिम बंटवारा।
सपा के सामने सीट बंटवारे में संतुलन की चुनौती
कांग्रेस की बड़ी मांग के बीच सपा की ओर से उम्मीदवारों की जीत की संभावना को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि INDIA गठबंधन का साझा लक्ष्य भाजपा को सत्ता से हटाना है और गठबंधन आगे बढ़ेगा।
दोनों दलों के सामने चुनौती यह है कि वे अपनी-अपनी राजनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसा समझौता करें, जिससे गठबंधन में तालमेल बना रहे। कांग्रेस सम्मानजनक हिस्सेदारी चाहती है, जबकि सपा के लिए सीटों का बंटवारा उम्मीदवारों की क्षमता और संबंधित क्षेत्रों में पार्टी की स्थिति के आधार पर तय करना महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस की ओर से नवंबर के मध्य तक बातचीत पूरी करने की समयसीमा तय किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। हालांकि, अंतिम समझौते की आधिकारिक घोषणा होने तक सीटों की संख्या को लेकर अटकलें जारी रह सकती हैं।
फिलहाल लखनऊ का “200 सीट हक है हमारा” पोस्टर आगामी चुनाव से पहले कांग्रेस की मांग को सार्वजनिक रूप से सामने लाता है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस और सपा बातचीत के जरिए सीट बंटवारे पर किस तरह सहमति बनाती हैं।

