Desh News

फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान वाले बयान पर भड़के दिलीप घोष, बोले- अब नहीं चलेगी ऐसी राजनीति

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

जम्मू-कश्मीर को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान संबंधी बयान पर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। पश्चिम बंगाल के मंत्री और भाजपा नेता दिलीप घोष ने रविवार को कोलकाता में अब्दुल्ला पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कुछ नेता पाकिस्तान का जिक्र करके लोगों के बीच डर पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि विभाजन की राजनीति अब काम नहीं करेगी और जम्मू-कश्मीर में विकास पर ध्यान देने की जरूरत है।

यह विवाद उस समय सामने आया है, जब फारूक अब्दुल्ला की एक टिप्पणी को लेकर भाजपा और अन्य संगठनों ने आपत्ति जताई है। अब्दुल्ला ने एक कार्यकर्ता सम्मेलन में कहा था कि पाकिस्तान कश्मीरियों की रक्षा करने की बात करता है। उनके बयान के बाद कई राजनीतिक नेताओं ने इसकी आलोचना की और उनसे स्पष्टीकरण की मांग की।

दिलीप घोष ने फारूक अब्दुल्ला पर साधा निशाना

दिलीप घोष ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पिछले कई दशकों से कुछ नेता पाकिस्तान का हवाला देकर राजनीति करते रहे हैं। उनके मुताबिक, कभी पाकिस्तान के साथ नरम रुख अपनाया जाता है, तो कभी उसी का डर दिखाकर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश होती है।

घोष ने दावा किया कि केंद्र सरकार के कार्यकाल में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर अंकुश लगाने और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के प्रयास हुए हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र को देश का अभिन्न हिस्सा मानते हुए वहां विकास की प्रक्रिया को मजबूत करना जरूरी है।

हालांकि, आतंकवाद पूरी तरह समाप्त होने संबंधी घोष के दावे को उनके राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति और विकास को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए आधिकारिक आंकड़ों तथा स्वतंत्र रिपोर्टों का आकलन जरूरी है।

फारूक अब्दुल्ला ने क्या कहा था?

फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को एक कार्यकर्ता सम्मेलन में दिल्ली से न्याय मिलने और जम्मू-कश्मीर के लोगों की पहचान से जुड़े सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि लोगों को अपनी पहचान के लिए आवाज उठानी चाहिए। इसी दौरान उन्होंने पाकिस्तान का उल्लेख करते हुए कहा कि वह कश्मीरियों की रक्षा करने की बात करता है।

अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासनिक कामकाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मेडिकल स्नातकों के लिए ग्रामीण अस्पतालों में दो साल की अनिवार्य सेवा से जुड़े नियम का उदाहरण दिया। उनके अनुसार, इस संबंध में उपराज्यपाल के कार्यालय में फाइल लंबे समय से लंबित है। उन्होंने नियम का पालन नहीं करने पर 50 लाख रुपये के जुर्माने का भी जिक्र किया।

अब्दुल्ला की टिप्पणी को भाजपा नेताओं ने पाकिस्तान के प्रति नरम रुख के रूप में पेश किया। हालांकि, उनके बयान में जम्मू-कश्मीर के प्रशासन और लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे।

भाजपा नेताओं ने की आलोचना, कार्रवाई की मांग भी उठी

फारूक अब्दुल्ला के बयान पर भाजपा नेताओं और विश्व हिंदू परिषद के कुछ पदाधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेता रविंदर रैना ने पाकिस्तान पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाया और सवाल किया कि उसे कश्मीरियों का हितैषी कैसे माना जा सकता है।

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने भी अब्दुल्ला की टिप्पणी की आलोचना की। कुछ नेताओं ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। इन प्रतिक्रियाओं के बीच राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं ने फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान संबंधी बयान से असहमति जताई, लेकिन जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने में देरी का मुद्दा भी उठाया। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि वह अब्दुल्ला की टिप्पणी से सहमत नहीं हैं। उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

जम्मू-कश्मीर के विकास और राज्य के दर्जे पर बहस

इस विवाद ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा, प्रशासन और राज्य के दर्जे जैसे मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है। भाजपा जहां केंद्र सरकार की नीतियों और विकास कार्यों पर जोर दे रही है, वहीं कांग्रेस राज्य का दर्जा बहाल करने और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग उठा रही है।

फिलहाल फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी हैं। इस बहस में पाकिस्तान की भूमिका, जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकार और क्षेत्र के भविष्य से जुड़े सवाल प्रमुख बने हुए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *