₹500 करोड़ के वायरल ऑडियो पर सियासत तेज, संजय राउत ने अमित शाह से ED जांच मांगी
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े ₹500 करोड़ के कथित लेनदेन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस मामले की प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग की है। विवाद एक वायरल ऑडियो क्लिप और मराठा आरक्षण आंदोलन के कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल की ओर से लगाए गए आरोपों से जुड़ा है।
संजय राउत का आरोप है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 से पहले मराठा आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने और उसे समाप्त कराने के उद्देश्य से कथित तौर पर बड़ी रकम देने की कोशिश की गई थी। उन्होंने इस मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP), उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके बेटे तथा शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, ये आरोप हैं और उपलब्ध जानकारी में इनके प्रमाणित होने या किसी जांच एजेंसी की ओर से निष्कर्ष जारी किए जाने की पुष्टि नहीं है।
संजय राउत ने अमित शाह को पत्र लिखकर क्या मांग की?
संजय राउत ने अपने पत्र में कहा कि कथित ₹500 करोड़ के लेनदेन की जांच धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की जानी चाहिए। उन्होंने यह पता लगाने की मांग की कि इतनी बड़ी रकम का स्रोत क्या था, कथित तौर पर पैसा किसे दिया जाना था और आखिरकार वह कहां गया।
राउत ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक गतिविधियों और आंदोलनों को प्रभावित करने के लिए धन के इस्तेमाल की आशंका की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उनके मुताबिक, महाराष्ट्र पुलिस और ED को मामले की जांच कर तथ्यों को सार्वजनिक करना चाहिए।
राउत ने अपने आरोपों में भाजपा के साथ एकनाथ शिंदे और श्रीकांत शिंदे का नाम भी लिया है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या कथित रकम वास्तव में मनोज जरांगे पाटिल तक पहुंची थी या नहीं। फिलहाल, इन दावों को स्वतंत्र रूप से साबित करने वाले निष्कर्ष सामने आने की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए मामले में आरोपों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।
मनोज जरांगे पाटिल ने भी उच्चस्तरीय जांच की मांग की
मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरे मनोज जरांगे पाटिल ने भी इस विवाद की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की।
जरांगे पाटिल का आरोप है कि उनके खिलाफ साजिश रचकर उन्हें बदनाम करने और मराठा समुदाय के आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री और शिंदे से विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग करते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष पड़ताल होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि ₹500 करोड़ से जुड़े इस विवाद को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, वह आने वाले लगभग एक महीने तक घटनाक्रम पर नजर रखेंगे और मामले को आगे उठाते रहेंगे। हालांकि, वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता, उसमें कथित बातचीत का पूरा संदर्भ और आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मराठा आरक्षण आंदोलन और महाराष्ट्र की राजनीति पर नजर
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण लंबे समय से महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा रहा है। ऐसे में आंदोलन को प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर धन देने के आरोप ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। संजय राउत की मांग के बाद अब इस बात पर ध्यान रहेगा कि संबंधित अधिकारी मामले की जांच शुरू करते हैं या नहीं।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार संजय राउत ने ED जांच और मनोज जरांगे पाटिल ने SIT जांच की मांग की है। मामले में किसी भी व्यक्ति या राजनीतिक दल की जिम्मेदारी तय करने के लिए वायरल ऑडियो की फॉरेंसिक जांच, धन के कथित लेनदेन से जुड़े दस्तावेज और संबंधित पक्षों के बयान महत्वपूर्ण होंगे।

