राहुल गांधी का बड़ा ऐलान, 1 नवंबर को दिल्ली में ‘वोट बचाओ’ रैली
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ जन मार्च और महारैली आयोजित करने की घोषणा की है। राहुल गांधी की वोट बचाओ रैली के जरिए कांग्रेस मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े सवालों को उठाने की तैयारी कर रही है। राहुल गांधी की वोट बचाओ रैली में उन्होंने छात्रों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों समेत लोकतंत्र की चिंता करने वाले लोगों से शामिल होने की अपील की है।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में जुटेंगे कांग्रेस समर्थक
राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा कर रैली में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से लोगों के नाम हटाए गए और नियम-कानूनों का उल्लंघन हुआ है।
अपने संदेश में उन्होंने यह भी दावा किया कि सवाल उठाने वालों पर लाठियां चलाई गईं। राहुल गांधी ने कहा कि इन मुद्दों पर लोग चुप नहीं रहेंगे और अब देश जवाब देगा। उनके इस बयान का केंद्र मताधिकार और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग है।
कांग्रेस की ओर से प्रस्तावित कार्यक्रम का नाम ‘वोट बचाओ, देश बचाओ जन मार्च और महारैली’ रखा गया है। पार्टी इस आयोजन के जरिए मतदाता सूची से जुड़े आरोपों को सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाना चाहती है।
हालांकि, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और कार्रवाई से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। इन दावों का आकलन संबंधित चुनावी रिकॉर्ड, शिकायतों और आधिकारिक जवाबों के आधार पर किया जाना चाहिए।
छात्रों, किसानों और व्यापारियों से राहुल गांधी की अपील
राहुल गांधी ने अपने संदेश में समाज के अलग-अलग वर्गों से रैली में शामिल होने की अपील की। इसमें छात्र, किसान, मजदूर, महिलाएं, युवा और व्यापारी शामिल हैं। उन्होंने लोकतंत्र को लेकर चिंतित नागरिकों से भी कार्यक्रम में आने का आग्रह किया।
कांग्रेस नेता ने अपने संदेश में मताधिकार को नागरिकों का अधिकार बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर लड़ाई भी जनता की है। उनके अनुसार, रैली का उद्देश्य वोट की सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े सवालों को उठाना है।
इस अपील के जरिए कांग्रेस व्यापक भागीदारी का संदेश देना चाहती है। रैली में कितने लोग शामिल होंगे और पार्टी किन मांगों को औपचारिक रूप से सामने रखेगी, यह कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट होगा।
हमारा वोट चुराया जा रहा है और ये हम किसी हाल में चुपचाप नहीं सहेंगे।
मतदाता सूचियों से नाम काटे गए। नियम-कानून तोड़े गए। और सवाल पूछने वालों पर लाठियां चलीं।
अब जवाब देश देगा।
1 नवंबर – चलो दिल्ली।
वोट बचाओ – देश बचाओ जन मार्च और महारैली।छात्र, किसान, मज़दूर, महिलाएं, नौजवान और व्यापारी – जिस-जिस को लोकतंत्र की फ़िक्र है, वो ज़रूर आए।
वोट आपका है। लड़ाई भी आपकी है।
📍 रामलीला मैदान, नई दिल्ली
PS: BJP और उसके साथियों का दिल से धन्यवाद, जो इस कार्यक्रम का इतना ज़ोर-शोर से प्रचार कर रहे हैं और इसे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
बस अगले 7 दिन भी यही जोश और लगन बनाए रखिए!
#ChaloDilli
#RamlilaMarch— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 25, 2026
भाजपा पर भी राहुल गांधी ने कसा तंज
राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगियों पर तंज भी कसा। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि वे इस कार्यक्रम का प्रचार कर इसे अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं।
उन्होंने भाजपा और उसके साथियों से अगले सात दिनों तक इसी उत्साह के साथ प्रचार जारी रखने की बात कही। यह बयान राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधने के साथ-साथ रैली को लेकर चर्चा बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।
फिलहाल, राहुल गांधी के बयान और कांग्रेस की रैली की घोषणा राजनीतिक बयानबाजी के बीच सामने आए हैं। कांग्रेस मतदाता सूची से जुड़े आरोपों को प्रमुख मुद्दा बना रही है, जबकि इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित तथ्यों और आधिकारिक प्रतिक्रियाओं को देखना जरूरी होगा।
दिल्ली के कारोबारियों ने रैली टालने की अपील क्यों की?
रैली की घोषणा से पहले दिल्ली के व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर कार्यक्रम की तारीख आगे बढ़ाने का अनुरोध किया था।
संगठन का कहना है कि अक्टूबर में रैलियों और सड़क बंद होने जैसी परिस्थितियों के कारण दिल्ली के कारोबारियों को नुकसान हुआ है। CTI ने दावा किया कि इस अवधि में व्यापार को करीब 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा।
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने राहुल गांधी से अपील की कि 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली को 10 नवंबर यानी भैया दूज के बाद आयोजित किया जाए। पत्र में कहा गया कि दिवाली के आसपास का समय कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है और इस दौरान बाजारों में व्यापार अपने चरम पर रहता है।
यह नुकसान का आंकड़ा व्यापारिक संगठन का दावा है। उपलब्ध जानकारी में इसके स्वतंत्र सत्यापन का विवरण नहीं दिया गया है।
रैली को लेकर अब क्या होगा?
अब 1 नवंबर को प्रस्तावित कार्यक्रम और उस पर राजनीतिक तथा कारोबारी प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी। कांग्रेस के सामने जहां मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोपों को प्रमुखता से उठाने की चुनौती है, वहीं व्यापारिक संगठन त्योहारों के दौरान बाजारों और यातायात पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जता रहा है।
रैली की तारीख में बदलाव की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। ऐसे में कार्यक्रम की स्थिति, प्रशासनिक व्यवस्था और यातायात से जुड़ी आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देना जरूरी होगा।
राहुल गांधी की घोषणा ने मताधिकार, चुनावी पारदर्शिता और राजनीतिक आयोजनों के आर्थिक प्रभाव जैसे मुद्दों को एक साथ चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस रैली को लेकर कांग्रेस, भाजपा और व्यापारिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं राजनीतिक बहस को आगे बढ़ा सकती हैं।

