रायहान वाड्रा की प्रदर्शनी पर विवाद, पवन खेड़ा ने BJP को घेरा
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कलाकार रायहान राजीव वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी से 75 तस्वीरें हटाए जाने को लेकर भाजपा और बीकानेर हाउस प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कला में राजनीतिक संदेश को लेकर अलग-अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं। खेड़ा का कहना है कि यदि किसी कलाकृति में सत्तारूढ़ नेतृत्व को प्रमुखता देना स्वीकार्य है, तो लोकतांत्रिक विरोध और नागरिक अधिकारों से जुड़ी तस्वीरों पर आपत्ति क्यों की जा रही है?
यह विवाद दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस में रायहान वाड्रा की एकल फोटो प्रदर्शनी ‘No Idea Is Final’ से जुड़ा है। रायहान कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे हैं। उनकी प्रदर्शनी में युवाओं के विरोध प्रदर्शनों और नागरिक आंदोलनों को दर्शाने वाली तस्वीरें शामिल की जानी थीं।
पवन खेड़ा ने पुरानी कलाकृति का उदाहरण देकर उठाए सवाल
पवन खेड़ा ने रविवार, 25 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया। इसमें सितंबर 2025 में बीकानेर हाउस में प्रदर्शित एक कलाकृति दिखाई गई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महात्मा गांधी को साथ दर्शाया गया था।
खेड़ा ने तर्क दिया कि किसी राजनीतिक नेता को महात्मा गांधी के साथ प्रदर्शित करना भी राजनीतिक संदेश दे सकता है। उन्होंने कहा कि जब सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों के प्रचार में प्रधानमंत्री की तस्वीर का व्यापक इस्तेमाल होता है, तो उनकी छवि को लेकर बनाई गई कलाकृति को राजनीति से अलग नहीं माना जा सकता।
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि यदि इस तरह की कलाकृति को प्रदर्शनी में जगह मिल सकती है, तो लोकतंत्र, संविधान और विरोध के अधिकार से संबंधित तस्वीरों को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी? उनके मुताबिक, विवाद केवल राजनीतिक कला का नहीं, बल्कि यह तय करने का है कि किस तरह की राजनीतिक अभिव्यक्ति को स्वीकार किया जाता है।
प्रदर्शनी खुलने से पहले 75 तस्वीरें हटाने को कहा गया
रिपोर्ट के अनुसार, रायहान वाड्रा ने अपनी एकल फोटो प्रदर्शनी में कुल 105 तस्वीरें प्रदर्शित करने की योजना बनाई थी। ये तस्वीरें दिल्ली में युवाओं के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों और नागरिक आंदोलनों को दर्ज करती थीं।
हालांकि, प्रदर्शनी आम लोगों के लिए खुलने से कुछ घंटे पहले बीकानेर हाउस प्रशासन ने 75 तस्वीरें हटाने को कहा। प्रशासन राजस्थान सरकार के अधीन काम करता है। बताया गया कि यह कदम परिसर में राजनीतिक सामग्री वाली कला प्रदर्शनियों पर लागू दिशा-निर्देशों के आधार पर उठाया गया।
रायहान वाड्रा ने कहा कि पूरी प्रदर्शनी रद्द होने की आशंका से बचने के लिए उन्होंने दबाव में इन तस्वीरों को हटाने का फैसला किया। उन्होंने पूरी और बिना बदलाव वाली तस्वीरों की श्रृंखला को दिल्ली के किसी दूसरे स्थान पर तथा बाद में बेंगलुरु में प्रदर्शित करने की योजना भी जताई है।
कांग्रेस ने सेंसरशिप कहा, भाजपा ने नियमों का दिया हवाला
तस्वीरें हटाए जाने के फैसले पर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे युवाओं की आवाज दबाने और लोकतांत्रिक असहमति को सामने लाने वाले कलाकारों को रोकने की कोशिश बताया।
वहीं, भाजपा के नेताओं और प्रवक्ताओं ने प्रशासनिक फैसले का समर्थन किया। उनका कहना है कि बीकानेर हाउस जैसे सरकारी सांस्कृतिक स्थलों पर राजनीतिक सामग्री को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं और अधिकारियों ने निर्धारित नियमों के तहत कार्रवाई की।
इस मामले में दोनों पक्षों के तर्क सामने आने के बाद बहस का केंद्र कला की स्वतंत्रता, सरकारी संस्थानों की नीतियों और राजनीतिक अभिव्यक्ति की सीमाएं बन गई हैं। फिलहाल, रायहान वाड्रा की ओर से पूरी तस्वीरों की श्रृंखला को दूसरे स्थानों पर प्रदर्शित करने की योजना इस विवाद को आगे भी चर्चा में रख सकती है।

