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ऑनलाइन गेम के जरिए 95 करोड़ की ठगी, 208 बैंक खाते खोले, 25 हजार की सैलेरी पर रखे लोग

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ऑनलाइन गेम के जरिए 95 करोड़ की ठगी, 208 बैंक खाते खोले, 25 हजार की सैलेरी पर रखे लोग

यूपी के आजमगढ़ में रानी की सराय स्थित साइबर थाने की पुलिस ने शनिवार को वाराणसी के पांडेयपुर में छापेमारी कर ऑनलाइन गेम के जरिए 95 करोड़ की ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गैंग का पर्दाफाश किया। पुलिस ने मौके से सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इनके तार श्रीलंका और यूएई से भी जुड़े बताए गए हैं। साइबर थाना की पुलिस को सूचना मिली कि वाराणसी के बड़ालालपुर के पांडेयपुर में किराए के दोमंजिला भवन में ऑनलाइन ठगी का कॉल सेंटर चल रहा है। वहां से ऑनलाइन गेम के नाम पर ठगी की जा रही है।

साइबर थानाध्यक्ष राजीव कुमार यादव ने सर्विलांस और स्वॉट टीम के साथ शनिवार भोर में छापा मारा। सेंटर से सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया। एसपी हेमराज मीना ने बताया कि गैंग से जुड़े लोग श्रीलंका और यूएई में भी हैं। वे व्हाट्सएप ग्रुपों से जुड़े थे। छह माह से वाराणसी से गिरोह का संचालन किया जा रहा था। गैंग के सदस्य ठगी के लिए 208 बैंक खातों का प्रयोग कर रहे थे। सभी खातों को फ्रीज करा दिया गया। इन खातों में सिर्फ एक करोड़ रुपये बचे थे। करीब 94 करोड़ रुपये निकाल लिये गए थे। गिरफ्तार लोगों के पास से 51 मोबाइल फोन, चार लैपटॉप, 42 एटीएम कार्ड, 13 बैंक पासबुक, 79 सिमकार्ड बरामद हुए।

ठगी को खोली फर्जी कंपनियां और 208 बैंक खाते

गेम के नाम पर ठगी करने के लिए साइबर बदमाशों ने फर्जी नाम से कई कंपनियां खोल रखी थीं। इसके साथ ही उन्होंने अलग-अलग बैंकों में 208 खाते खुलवाए थे। रजिस्टर्ड फर्जी कंपनियों के एकाउंट में रुपये भेजते थे। वे लोगों को अपने जाल में फंसाने के बाद अवैध क्रिकेट बज गेम खेलवाते थे। गेम खेलने वाले लोगों को रुपये दो और तीन गुना करने का लालच देते थे। गेम में अधिक रुपये लगाने पर ठगी करते थे। पहले फर्जी खाते में रुपये मंगाते थे। इसके बाद फर्जी नाम से लिए मोबाइल नंबर से एप के जरिए रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर निकाल लेते थे।

व्हाट्सएप, टेलीग्राम, फेसबुक पर विज्ञापन के माध्यम से लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। इसके बाद वेबसाइट https://allpanels.com.in पर लॉगिन कराकर गेम में टॉस्क पूरा करने का झांसा देते थे। दो और तीन गुना रुपये जीतने का प्रलोभन देते थे। अधिक रुपये लगाने पर लोगों के साथ ठगी करते थे। गेम खेलने वालों के रुपये फर्जी खातों और फर्जी मोबाइल नंबरों के जरिए ट्रांसफर करते थे। साइबर ठग विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से आम लोगों से बात करते थे। इसके बाद गेम खेलने के लिए प्रेरित करते थे। जिसकी एक लॉगिन आईडी बनाई जाती थी। जिसके लिए एक निर्धारित फीस होती थी।

साइबर ठग व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से देश-विदेश के सदस्यों से बात करते थे। लेन-देन की जानकारी भी व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से ही देते थे। पांच माह पूर्व इनके गैंग को पुलिस ने आजमगढ़ शहर के रैदोपुर से गिरफ्तार कर खुलासा किया था। इसके बाद गैंग के सदस्यों ने वाराणसी को अपना ठिकाना बना लिया। जनपद की साइबर थाना की पुलिस गिरोह के सदस्यों की तलाश कर रही थी।

लगातार निगरानी के बाद पुलिस को सफलता मिली। साइबर ठग स्मार्ट तरीके से काम कर रहे थे। साबइर ठगी के लिए विभिन्न लोगों के नाम पर 208 बैंक खाते खोले। इसके साथ ही रजिस्टर्ड फर्जी कंपनियां चलाते थे। फर्जी कंपनियों में ठगी के रुपये भेजते थे। कंपनियों के खातों में साइबर ठगी के रुपये मंगाते थे। इसके बाद कंपनी के सामान खरीदने के नाम पर रुपये निकाल लेते थे। एटीएमकार्ड और चेक बुक से भी बैंक खातों से रुपये निकालते थे।

साइबर ठगी में ये लोग हुए गिरफ्तार

शुभम जायसवाल निवासी भाईपुर कला थाना जमालपुर जनपद मिर्जापुर, धनजीत यादव निवासी गोबरा थाना चंदवकजौनपुर, अजय यादव निवासी चोलापुर जनपद वाराणसी, अभय राय निवासी बलुआ चंदौली, अविनाश राय आसनसोल पश्चिम बंगाल, शुभम यादव निवासी मुरेरी थाना चोलापुर जनपद वाराणसी और पीयूष यादव निवासी धर्मापुर थाना गौरा बादशाहपुर जनपद जौनपुर।

25 हजार रुपये मिलती थी सैलरी

साइबर ठगी के लिए काम करने वालों को प्रलोभन दिया जाता था। इसके साथ ही उन्हें काम करने के लिए हर महीने 20 से 25 हजार रुपये सैलरी दी जाती थी। पकड़े गए लोगों को फर्जी बैंक खाते कहीं और से और फर्जी मोबाइल नंबर कहीं और से उपलब्ध कराए जाते थे।

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