वाल्मीकि जयंती पर कानपुर को ₹411 करोड़ की सौगात, युवाओं के लिए नई पहल
उत्तर प्रदेश में वाल्मीकि जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानपुर नगर के विकास को गति देने के लिए 411 करोड़ रुपये से अधिक की 48 परियोजनाओं की घोषणा की। सोमवार, 26 अक्टूबर को इन परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया जाना है। इन योजनाओं का संबंध बिल्हौर और बिठूर विधानसभा क्षेत्रों से है। इस दौरान विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाणपत्र भी वितरित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि माने जाने वाले बिठूर जाने की बात कही। सरकार का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के साथ विकास योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाना है। इसके साथ ही योगी आदित्यनाथ ने युवाओं के लिए तकनीक, नवाचार और उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया।
कानपुर में 48 विकास परियोजनाओं पर होगा काम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, कानपुर नगर के बिल्हौर और बिठूर विधानसभा क्षेत्रों में 411 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 48 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया जाएगा। इन परियोजनाओं से संबंधित विस्तृत कार्यों और प्रत्येक योजना की अलग-अलग लागत का ब्योरा उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।
सरकार का कहना है कि शहरी और स्थानीय बुनियादी सुविधाओं का विस्तार उसकी विकास नीति का अहम हिस्सा है। परियोजनाओं के साथ कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित करने का कार्यक्रम भी रखा गया है। इससे विकास कार्यों और जनकल्याण योजनाओं को एक साथ आगे बढ़ाने की सरकार की कोशिश दिखाई देती है।
योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने संदेश में कहा कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय युवाओं को अपने ही प्रदेश में आगे बढ़ने और पहचान बनाने के अवसर मिलने चाहिए।
GCC Innovation Summit 2026 से युवाओं को क्या उम्मीद?
कानपुर में विकास कार्यक्रमों के साथ मुख्यमंत्री लखनऊ में GCC Innovation Summit 2026 का उद्घाटन भी करेंगे। इस सम्मेलन के दौरान वैश्विक कंपनियों, संस्थानों और विश्वविद्यालयों के साथ कई समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाने का कार्यक्रम है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, इन समझौतों से तकनीकी शोध, नवाचार और उच्च कौशल आधारित रोजगार के नए अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रस्तावित समझौतों की संख्या, निवेश की कुल राशि या रोजगार के संभावित आंकड़े नहीं बताए गए हैं।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) आम तौर पर ऐसी इकाइयां होती हैं, जिनके माध्यम से बहुराष्ट्रीय कंपनियां तकनीकी सेवाओं, शोध, डेटा विश्लेषण और अन्य विशेषज्ञ कार्यों का संचालन करती हैं। ऐसे केंद्रों के विस्तार से प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बन सकते हैं। सम्मेलन के जरिए उत्तर प्रदेश में तकनीकी निवेश और वैश्विक संस्थानों के साथ सहयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाएगा।
जनसुविधाओं के विस्तार से नागरिकों का जीवन सुगम हो और निवेश एवं नवाचार से युवाओं के लिए नए अवसर सृजित हों, यही ‘नए उत्तर प्रदेश’ के विकास का संकल्प है।
आज आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी की पावन जयंती पर उनकी तपोभूमि बिठूर में लोकमंगल और जनकल्याण के इसी संकल्प को आगे बढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त होगा।
इस अवसर पर कानपुर नगर के बिठूर में बिल्हौर एवं बिठूर विधान सभा क्षेत्रों की ₹411 करोड़ से अधिक लागत की 48 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करूंगा। साथ ही, विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए जाएंगे।
एक ओर जनजीवन को बेहतर बनाने वाली विकास परियोजनाएं, तो दूसरी ओर युवाओं का भविष्य संवारने वाले निवेश और नवाचार के अवसर। इसी विकास दृष्टि को आगे बढ़ाते हुए लखनऊ में GCC Innovation Summit 2026 का शुभारंभ करूंगा।
इस अवसर पर वैश्विक कंपनियों एवं विश्वविद्यालयों के साथ होने वाले MoUs तकनीकी अनुसंधान, नवाचार और उच्च कौशल आधारित रोजगार की नई संभावनाओं के द्वार खोलेंगे।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के यशस्वी मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार का संकल्प है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और उत्तर प्रदेश के युवाओं को अपनी ही धरती पर वैश्विक पहचान बनाने का अवसर मिले।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) October 26, 2026
प्रधानमंत्री मोदी ने महर्षि वाल्मीकि को किया नमन
वाल्मीकि जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं को भारतीय संस्कृति और विरासत का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि उनके मानवता से जुड़े संदेश आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
महर्षि वाल्मीकि को रामायण के प्राचीनतम स्वरूप के रचयिता के रूप में सम्मान दिया जाता है। उन्हें संस्कृत साहित्य का आदिकवि, यानी प्रथम कवि, भी कहा जाता है। उनकी रचनाओं में भगवान राम की कथा के साथ धर्म, कर्तव्य और मानवीय मूल्यों से जुड़े प्रसंग मिलते हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार, वाल्मीकि जयंती आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह पर्व महर्षि वाल्मीकि के जीवन, साहित्यिक योगदान और आध्यात्मिक शिक्षाओं को याद करने का अवसर है। इस वर्ष उत्तर प्रदेश में जयंती के मौके पर विकास परियोजनाओं और तकनीकी नवाचार से जुड़ी पहलों को भी प्रमुखता दी गई।

