लखनऊ में अखिलेश यादव पर पोस्टर वार, चाय-समोसे से माफिया तक का तंज
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार, 23 अक्टूबर को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव को निशाना बनाकर लगाए गए विवादित पोस्टर ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी। नेशनल पीजी कॉलेज चौराहे पर लगाए गए इस पोस्टर में अखिलेश यादव के साथ पूर्व गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और जेल में बंद सपा के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान की तस्वीरें दिखाई गईं।
पोस्टर पर लिखे तंज भरे नारे ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी के बीच बयानबाजी लगातार बढ़ रही है।
लखनऊ में पोस्टर के जरिए अखिलेश यादव पर निशाना
नेशनल पीजी कॉलेज चौराहे पर लगाए गए पोस्टर में लिखा था, “सपाइयों का क्या भरोसा — चाय, समोसा, रसमलाई, सारे माफिया अपने भाई।” इस नारे के जरिए सपा नेतृत्व पर अपराधियों से कथित नजदीकी रखने का आरोप लगाने की कोशिश की गई है।
पोस्टर में अखिलेश यादव को सफेद टोपी पहने दिखाया गया है। उनके साथ अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और मोहम्मद आजम खान की तस्वीरें लगाई गई हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में पोस्टर लगाने वाले व्यक्ति या संगठन की आधिकारिक पहचान स्पष्ट नहीं हुई है।
यह पोस्टर अखिलेश यादव की रामपुर जिला जेल में आजम खान से मुलाकात के बाद सामने आया है। इस मुलाकात को लेकर भाजपा और उसके सहयोगी दलों की ओर से सपा पर राजनीतिक लाभ लेने और आपराधिक तत्वों के प्रति नरम रुख अपनाने जैसे आरोप लगाए गए हैं। सपा की ओर से इन आरोपों पर राजनीतिक स्तर पर जवाब दिया जाता रहा है।
आजम खान के समर्थन में क्या बोले अखिलेश यादव?
22 अक्टूबर को आजम खान से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने कहा था कि उनकी पार्टी एकजुट है और 2027 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने के लिए मिलकर काम करेगी। उन्होंने आजम खान के साथ अपने राजनीतिक संबंधों को भी दोहराया।
अखिलेश यादव ने आजम खान और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि खान के परिवार को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया और उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए। उन्होंने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की स्थिति पर भी चिंता जताई और आरोप लगाया कि सरकार की कार्रवाई से शैक्षणिक संस्थान को नुकसान पहुंचा है।
आजम खान रामपुर सदर सीट से दस बार विधायक रह चुके हैं और सपा के प्रमुख मुस्लिम नेताओं में गिने जाते हैं। उपलब्ध खबर के अनुसार, जालसाजी के एक मामले में दोषसिद्धि के बाद वह पिछले साल नवंबर से रामपुर जिला जेल में बंद हैं। उनके मामले को लेकर सपा और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
जातिगत जनगणना और महिला आरक्षण पर भी सपा का रुख
अखिलेश यादव ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की संभावित हार का दावा भी किया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे और भाजपा की योजनाएं इस बार सफल नहीं होंगी। ये उनके राजनीतिक दावे हैं, जिनका वास्तविक परिणाम आगामी चुनाव में ही स्पष्ट होगा।
जातिगत जनगणना के मुद्दे पर सपा प्रमुख ने पिछड़े वर्गों, दलितों और वंचित समुदायों की आबादी के अनुपात में आरक्षण देने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने बिंद, निषाद और कश्यप सहित विभिन्न समुदायों की मांगों का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिए जातिगत जनगणना जरूरी है।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने भाजपा पर इसे लागू करने में देरी करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि सपा ने पार्टी के टिकट वितरण में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने का निर्देश दिया है। उनके मुताबिक, यह विचार मुलायम सिंह यादव के समय से पार्टी की राजनीतिक सोच का हिस्सा रहा है।
वहीं, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के रामपुर दौरे और वहां चुनाव लड़ने की संभावना पर अखिलेश यादव ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी दल को चुनाव लड़ने का अधिकार है।
फिलहाल, लखनऊ में पोस्टर के जरिए शुरू हुआ यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप के बढ़ते माहौल को दर्शाता है। विधानसभा चुनाव से पहले सपा और भाजपा के बीच ऐसे मुद्दे राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं।

