कर्नाटक में सूखे से ₹62 हजार करोड़ का नुकसान, केंद्र से मांगे ₹20,585 करोड़
कर्नाटक में खरीफ सीजन के दौरान पड़े भीषण सूखे ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य सरकार के अनुसार, सूखे के कारण कृषि और बागवानी फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। इस स्थिति से निपटने के लिए कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
राज्य सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के तहत 20,585.73 करोड़ रुपये की सहायता मांगी है। सरकार का अनुमान है कि सूखे से राज्य को कुल 62,481.88 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यह संकट राज्य के लाखों किसानों और ग्रामीण परिवारों की आजीविका पर असर डाल रहा है।
कर्नाटक में बारिश की भारी कमी, 226 तालुक सूखाग्रस्त घोषित
जी परमेश्वर ने 22 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को छह पन्नों का पत्र लिखा। इसमें बताया गया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 के दौरान कर्नाटक में सामान्य 852 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले केवल 551 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। यानी बारिश में करीब 35 प्रतिशत की कमी रही।
पत्र के मुताबिक, यह 1956 के बाद राज्य में दर्ज दूसरी सबसे कम और 1901 के बाद सातवीं सबसे कम मानसूनी वर्षा है। मानसून के कुल 122 दिनों में से 79 दिन बारिश सामान्य से कम रही या भारी कमी दर्ज की गई। इससे खेतों में खड़ी फसलों को गंभीर नुकसान पहुंचा।
सूखे की स्थिति का आकलन करने के बाद राज्य सरकार ने कुल 226 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इनमें पहले घोषित 177 तालुकों के अलावा 49 नए तालुक भी शामिल हैं।
सरकारी आकलन के अनुसार, 53.92 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि की फसलें और 4.01 लाख हेक्टेयर बागवानी फसलें प्रभावित हुई हैं। कई क्षेत्रों में फसलों को 33 से 100 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा है। अधिकांश प्रभावित फसलों में नुकसान 50 प्रतिशत से अधिक बताया गया है।
मक्का, अरहर और कपास समेत कई फसलों को भारी नुकसान
कर्नाटक में सूखे का असर कई प्रमुख फसलों पर पड़ा है। मक्का की 11.82 लाख हेक्टेयर, अरहर की 10.12 लाख हेक्टेयर, कपास की 6.68 लाख हेक्टेयर और रागी की 5.56 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। इसके अलावा गन्ना, मूंग, सोयाबीन और धान की खेती को भी नुकसान पहुंचा है।
बागवानी क्षेत्र में आम, नारियल, लाल मिर्च और सुपारी की फसलें भी प्रभावित हुई हैं। इससे किसानों की आय पर दबाव बढ़ने और खेती की लागत निकालने में परेशानी होने की आशंका है।
राज्य सरकार ने राहत राशि के प्रस्ताव में फसल नुकसान की भरपाई के लिए 6,128.70 करोड़ रुपये मांगे हैं। इसके अतिरिक्त 61.91 लाख छोटे और सीमांत किसानों के लिए 12,146.99 करोड़ रुपये की सहायता का अनुरोध किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, पात्र किसानों को 60 दिनों के लिए प्रतिदिन 327 रुपये की दर से राहत देने की मांग है।
पशुपालन और पेयजल व्यवस्था के लिए भी अलग से धन मांगा गया है। सरकार ने पेयजल आपूर्ति और योजनाओं की मरम्मत के लिए 1,727 करोड़ रुपये तथा पशुपालन संबंधी उपायों के लिए 583.04 करोड़ रुपये की सहायता का प्रस्ताव दिया है। इसमें पशु शिविर, चारा बैंक और पशुओं के लिए दवाओं की व्यवस्था शामिल है।
बच्चों के पोषण और किसानों की मदद के लिए भी मांगी राशि
कर्नाटक सरकार ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों में बच्चों और माताओं के पोषण पर भी ध्यान देने की मांग की है। इसके तहत गर्मी की छुट्टियों के दौरान स्कूली बच्चों को पोषण सहायता उपलब्ध कराने के लिए पीएम पोषण योजना के अंतर्गत 427.20 करोड़ रुपये मांगे गए हैं। वहीं, पूरक पोषण कार्यक्रम के लिए 70.96 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है।
जी परमेश्वर ने कृषि सब्सिडी की गणना में इस्तेमाल होने वाले 2015-16 के कृषि जनगणना आंकड़ों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि पुराने आंकड़े वर्तमान भूमि जोत की सही स्थिति नहीं बताते, जिससे करीब 1,609.50 करोड़ रुपये की सहायता में कमी हो सकती है। उन्होंने लाभार्थियों की पहचान के लिए राज्य के FRUITS डेटाबेस का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया है।
राज्य सरकार ने बताया कि केंद्र की अंतर-मंत्रालयी टीम 3 से 6 अक्टूबर के बीच सूखे की स्थिति का आकलन कर चुकी है। अब राज्य चाहता है कि रिपोर्ट पर जल्द कार्रवाई हो और राहत राशि जारी की जाए।
उपमुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि किसानों के लिए हर बीतता सप्ताह महत्वपूर्ण है। हालांकि, मांगी गई राशि पर केंद्र की अंतिम मंजूरी और भुगतान की स्थिति की जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अब किसानों को राहत मिलने के लिए केंद्र सरकार के अगले कदम का इंतजार है।

