फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान वाले बयान पर भड़कीं शाइना NC, बताया देशविरोधी
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। शिवसेना नेता शाइना एनसी ने उनके बयान की आलोचना करते हुए इसे देशविरोधी और पाकिस्तान के विचारों को दोहराने वाला बताया। वहीं, हरियाणा के मंत्री अनिल विज और पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने भी फारूक अब्दुल्ला पर निशाना साधा।
यह विवाद शनिवार को एक कार्यकर्ता सम्मेलन में फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों के सामने न्याय, पहचान और दिल्ली के प्रशासनिक नियंत्रण से जुड़े सवाल उठाए थे। इसके साथ उन्होंने पाकिस्तान का जिक्र करते हुए कहा था कि वह कश्मीरियों की रक्षा करने की बात करता है। उनके इस बयान पर भाजपा और शिवसेना नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
शाइना एनसी ने फारूक अब्दुल्ला पर साधा निशाना
शिवसेना नेता शाइना एनसी ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि जब वरिष्ठ नेता पाकिस्तान को कश्मीरियों का रक्षक बताते हैं, तो उनके नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने आरोप लगाया कि फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी पाकिस्तान के रुख से मेल खाती है।
शाइना ने महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू का उल्लेख करते हुए भी फारूक अब्दुल्ला की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बयान से देश की एकता और राष्ट्रीय हितों को लेकर गलत संदेश जाता है। हालांकि, ये शाइना एनसी के राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें किसी कानूनी निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
फारूक अब्दुल्ला ने अपने बयान में दिल्ली से न्याय मिलने को लेकर सवाल उठाया था। उन्होंने स्थानीय लोगों से अपनी पहचान और अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की थी। उनके बयान का यही हिस्सा अब राजनीतिक बहस का प्रमुख केंद्र बन गया है।
अनिल विज और दिलीप घोष ने भी उठाए सवाल
हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने फारूक अब्दुल्ला पर आरोप लगाया कि उनका झुकाव भारत के बजाय पाकिस्तान की ओर अधिक है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाकर क्षेत्र की विशेष संवैधानिक स्थिति समाप्त कर दी।
विज ने जम्मू-कश्मीर में G20 बैठकों और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का जिक्र करते हुए कहा कि क्षेत्र में बदलाव और विकास की गतिविधियां जारी हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ तत्व अब भी अशांति फैलाने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनके प्रयास सफल नहीं होंगे।
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने भी फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी को लेकर आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान का जिक्र करके लोगों के बीच डर और विभाजन पैदा करने की कोशिश की जा रही है। घोष के मुताबिक, केंद्र सरकार के कार्यकाल में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर अंकुश लगाने और विकास को बढ़ावा देने के प्रयास हुए हैं। इन बयानों पर फारूक अब्दुल्ला की ओर से प्रतिक्रिया का विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
LG के पास लंबित फाइल और कश्मीर की पहचान का मुद्दा
अपने कार्यकर्ता सम्मेलन में फारूक अब्दुल्ला ने केवल पाकिस्तान का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि जम्मू-कश्मीर के प्रशासनिक ढांचे पर भी सवाल किए। उन्होंने एक नियम से जुड़ी फाइल का उदाहरण दिया, जिसके तहत MBBS, MD और MS की पढ़ाई पूरी करने वाले डॉक्टरों को ग्रामीण अस्पतालों में दो साल की अनिवार्य सेवा करनी होगी या 50 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा।
अब्दुल्ला के अनुसार, इस प्रस्ताव से संबंधित फाइल एक साल से उपराज्यपाल के पास लंबित है और उसे मंजूरी नहीं मिली है। उन्होंने इसे प्रशासनिक देरी का उदाहरण बताते हुए पूछा कि ऐसी स्थिति में स्थानीय लोगों को न्याय मिलने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं। फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीरियों की पहचान, अधिकारों और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठाए, जबकि भाजपा नेताओं ने उनके पाकिस्तान संबंधी बयान को राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताया। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

