इमरान मसूद का BJP पर पलटवार, बोले- देशभक्ति का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि उन्हें अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए किसी से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से सांसद मसूद ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में विवादित नारों और पोस्टरों से जुड़े सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए न्यायिक प्रक्रिया में देरी तथा चुनावी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।
ANI से बातचीत में मसूद ने उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई की मांग से जुड़े पोस्टरों के मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी आरोपी के दोषी या निर्दोष होने का फैसला अदालत को करना चाहिए, लेकिन मुकदमे की प्रक्रिया लंबे समय तक शुरू नहीं होना न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। उनके बयान ऐसे समय आए हैं, जब कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं।
जामिया विवाद और न्यायिक देरी पर उठाए सवाल
इमरान मसूद ने कहा कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि लोगों को होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले पर ध्यान देने की अपील करते हुए कहा कि यदि किसी मामले में पांच साल बीतने के बाद भी मुकदमे की सुनवाई शुरू नहीं होती, तो इस पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी दोषी हैं या नहीं, इसका निर्णय अदालत को करना है। उनके मुताबिक, न्यायिक प्रक्रिया को लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ाने से लोगों के मन में व्यवस्था को लेकर संदेह पैदा हो सकता है।
जामिया और JNU में उमर खालिद तथा शरजील इमाम की रिहाई की मांग वाले नारों और पोस्टरों को लेकर भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर सवाल उठाए थे। इस पर मसूद ने देशविरोधी विचारों से जुड़े आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि भारत की एकता और अखंडता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट है।
मसूद ने दावा किया कि उन्होंने मीडिया के सामने जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया था और वहां मौजूद छात्रों ने भी उनकी बात का समर्थन किया था। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि विवादित नारे आंदोलन को कमजोर करने के उद्देश्य से लिखे गए थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप, चुनाव आयोग से मांगा जवाब
कांग्रेस सांसद ने उत्तर प्रदेश में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पीलीभीत से जुड़े शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की वोटर लिस्ट में पिता के नाम की जगह गलत या असामान्य विवरण दर्ज होने का आरोप लगाया।
मसूद ने कहा कि ऐसे मामलों को केवल तकनीकी गलती बताकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग से इस संबंध में जवाब देने की मांग की और आरोप लगाया कि देश की संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है।
हालांकि, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी की वास्तविक प्रकृति, उसका दायरा और जिम्मेदारी तय करने के लिए आधिकारिक जांच या संबंधित चुनावी रिकॉर्ड जरूरी हैं। फिलहाल, मसूद के बयान को कांग्रेस की ओर से उठाए गए राजनीतिक आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए।
1 नवंबर की रैली पर भाजपा-कांग्रेस में टकराव
दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस की रैली को लेकर भी विवाद बढ़ गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने रैली की तारीख पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि 1 नवंबर की तारीख 1984 के सिख विरोधी दंगों की याद से जुड़ी है और इस दिन कार्यक्रम आयोजित करने से सिख समुदाय की भावनाएं आहत हो सकती हैं।
प्रसाद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से रैली की तारीख बदलने की मांग की थी। उन्होंने करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोलने और छोटे साहिबजादों के बलिदान को सम्मान देने जैसे कदमों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार की पहल का भी जिक्र किया।
इसके जवाब में मसूद ने रविशंकर प्रसाद की आलोचना करते हुए उनकी उम्र को लेकर टिप्पणी की और कहा कि भाजपा को राहुल गांधी की चिंता रहती है। इस तरह जामिया विवाद, चुनावी पारदर्शिता और रैली की तारीख को लेकर कांग्रेस तथा भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।

