UP News

UP चुनाव से पहले अखिलेश यादव का नया दांव, ब्राह्मण और निषाद वोटों पर नजर

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पोस्टर के जरिए सियासी संदेश देने की होड़ तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की तस्वीर वाला एक नया पोस्टर लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय के बाहर लगाया गया है। इसमें ब्राह्मण, केवट और PDA गठबंधन को एक साथ जोड़ने की कोशिश दिखाई गई है। पोस्टर पर लिखा है, “ब्राह्मण दिखाएंगे राह, केवट लगाएंगे पार, मिलकर बनाएंगे PDA सरकार।”

इस नारे के जरिए सपा ने अपने पारंपरिक पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक आधार के साथ दूसरे सामाजिक समूहों तक पहुंच बढ़ाने का संकेत दिया है। राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाने वाले ब्राह्मण और निषाद-केवट समुदायों को साधने की यह कोशिश आगामी चुनाव की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

ब्राह्मण और केवट समुदायों को जोड़ने की कोशिश

लखनऊ में लगाए गए पोस्टर में अखिलेश यादव को नाव पर सवार दिखाया गया है। इसके साथ केवट समुदाय और ब्राह्मण समाज का प्रतीकात्मक उल्लेख किया गया है। पोस्टर की कल्पना रामायण के उस प्रसंग की याद दिलाती है, जिसमें केवट भगवान राम और लक्ष्मण को गंगा पार कराते हैं।

सपा के इस संदेश को सामाजिक समीकरणों का विस्तार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी ब्राह्मण मतदाताओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के साथ गंगा के आसपास के इलाकों में प्रभाव रखने वाले निषाद, केवट और मल्लाह समुदायों को भी आकर्षित करना चाहती है। हालांकि, पोस्टर से यह तय नहीं होता कि इन समुदायों का कितना समर्थन पार्टी को मिलेगा।

समाजवादी पार्टी का PDA फॉर्मूला पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को साथ लाने पर केंद्रित रहा है। नए नारे के जरिए पार्टी इस सामाजिक गठबंधन का दायरा बढ़ाने का संदेश देती दिख रही है। इन समुदायों का समर्थन कई विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकता है।

भाजपा के पोस्टर के जवाब में सपा का सियासी संदेश

इससे पहले 23 अक्टूबर को लखनऊ के नेशनल पीजी कॉलेज चौराहे के पास अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को निशाना बनाते हुए एक विवादित होर्डिंग सामने आया था। उस पोस्टर में सपा पर माफिया से जुड़े लोगों को संरक्षण देने का आरोप लगाने वाला तंज लिखा गया था। इसमें अखिलेश यादव के साथ अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान की तस्वीरें भी दिखाई गई थीं।

यह पोस्टर अखिलेश यादव के रामपुर जेल जाकर आजम खान से मुलाकात करने के बाद सामने आया था। इस मुलाकात को लेकर भाजपा और उसके सहयोगियों ने सपा पर राजनीतिक लाभ लेने के आरोप लगाए थे। ऐसे माहौल में सपा का नया पोस्टर राजनीतिक संदेश और जवाबी प्रचार के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, नए पोस्टर को किसने तैयार कराया और इसके पीछे पार्टी की औपचारिक रणनीति क्या है, इसकी अलग से पुष्टि जरूरी है। इतना स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में चुनाव से काफी पहले ही पोस्टर और नारों के जरिए राजनीतिक दल अपने-अपने सामाजिक समीकरण पेश करने लगे हैं।

2027 में सरकार बनाने का दावा, जातीय जनगणना पर भी जोर

अखिलेश यादव ने 22 अक्टूबर को कहा था कि उनकी पार्टी 2027 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने के लिए एकजुट होकर काम कर रही है। उन्होंने भाजपा की हार का दावा करते हुए जातीय जनगणना और आबादी के अनुपात में आरक्षण की मांग का समर्थन किया था। उन्होंने बिंद, निषाद और कश्यप समेत पिछड़े तथा वंचित समुदायों के लिए जनसंख्या के अनुरूप आरक्षण की बात कही।

महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी सपा प्रमुख ने भाजपा पर इसे लागू करने में देरी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों में 33 प्रतिशत महिलाओं को शामिल करने का निर्देश दिया है। यह दावा आगामी चुनाव में महिला मतदाताओं को साधने की रणनीति से भी जुड़ा है।

2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से सपा ने 37 सीटें जीतकर राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में प्रदर्शन किया था। अब पार्टी इसी आधार को मजबूत करते हुए नए सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, भाजपा भी अपने समर्थक वर्गों को एकजुट रखने के लिए सक्रिय है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पोस्टर, जातीय समीकरण और आरक्षण जैसे मुद्दे राज्य की राजनीति में अहम बने रह सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *