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सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट मामले में सुनवाई टली, अब 6 नवंबर को होगी पेशी

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कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के नाम को लेकर मतदाता सूची से जुड़े मामले में बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को सुनवाई नहीं हो सकी। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में वकीलों की हड़ताल के कारण सुनवाई टाल दी गई। अब इस मामले में अगली सुनवाई 6 नवंबर को निर्धारित की गई है।

यह शिकायत सोनिया गांधी का नाम वर्ष 1980 की मतदाता सूची में शामिल किए जाने से संबंधित है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उस समय सोनिया गांधी भारतीय नागरिक नहीं बनी थीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। हालांकि, ये शिकायत में लगाए गए आरोप हैं और मामले में अभी अंतिम न्यायिक फैसला नहीं आया है।

इस मामले की सुनवाई सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाले अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) विनोद जोशी की अदालत में होनी है। इससे पहले निचली अदालत ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी यानी FIR दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया था। बाद में सत्र अदालत ने उस आदेश को रद्द करते हुए मामले को नए सिरे से विचार के लिए वापस भेज दिया।

वकीलों की हड़ताल के कारण आगे बढ़ी सुनवाई

बुधवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में मामले की सुनवाई नहीं हो पाई। अदालत ने अगली तारीख 6 नवंबर तय की है। अब मजिस्ट्रेट अदालत को शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों पर दोबारा विचार करना होगा।

यह मामला अधिवक्ता विकास त्रिपाठी की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिक बनने से पहले मतदाता सूची में शामिल किया गया था। शिकायत में इस संबंध में पुराने चुनावी रिकॉर्ड का हवाला दिया गया है।

हालांकि, किसी शिकायत का अदालत में विचाराधीन होना आरोपों को साबित नहीं करता। मामले में यह तय होना बाकी है कि शिकायत और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है या नहीं।

सत्र अदालत ने पहले का आदेश क्यों पलटा?

21 सितंबर को विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने शिकायतकर्ता की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए मजिस्ट्रेट अदालत के 2025 के आदेश को रद्द कर दिया था। पहले के आदेश में शिकायत के साथ प्रस्तुत दस्तावेज की फोटोकॉपी को अप्रमाणित बताते हुए शिकायत पर कार्रवाई करने से इनकार किया गया था।

सत्र अदालत ने कहा था कि पहले के आदेश में शिकायत खारिज करने के कारणों को पर्याप्त रूप से दर्ज नहीं किया गया। अदालत के अनुसार, आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि शिकायत में संज्ञेय अपराध बनने की संभावना पर क्या विचार किया गया। इसी आधार पर आदेश को दोबारा विचार के लिए वापस भेजना उचित माना गया।

सत्र अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह स्वयं मजिस्ट्रेट की भूमिका नहीं निभा सकती। इसलिए मामले के तथ्यों और शिकायत पर प्रारंभिक स्तर पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत की ही होगी।

मतदाता सूची और नागरिकता को लेकर क्या है विवाद?

शिकायत में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 की मतदाता सूची में दर्ज था, 1982 में हटाया गया और फिर 1983 में दोबारा शामिल किया गया। सत्र अदालत के आदेश में इन आरोपों और शिकायतकर्ता की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों का उल्लेख किया गया था। शिकायत के अनुसार, रिकॉर्ड में उनका पता नई दिल्ली के सफदरजंग रोड का बताया गया है।

सत्र अदालत ने मामले को वापस भेजते हुए निर्देश दिया था कि मजिस्ट्रेट संबंधित पुलिस अधिकारी से स्थिति रिपोर्ट मंगवाए और पक्षों को सुनने के बाद कारणों सहित स्पष्ट आदेश पारित करे। अब अगली सुनवाई में यह प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

फिलहाल, अदालत ने शिकायत में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। 6 नवंबर को होने वाली सुनवाई में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत के निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।

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