सोशल मीडिया अकाउंट बंद करने पर विवाद, अभिजीत दीपके ने सरकार पर उठाए सवाल
सोशल मीडिया अकाउंट और पोस्ट हटाने को लेकर देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस तेज हो गई है। कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सोशल मीडिया अकाउंट बंद करने से लोगों की समस्याएं और उनके सवाल खत्म नहीं होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाई से सरकार और जनता के बीच भरोसे की कमी बढ़ सकती है।
दीपके की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामग्री हटाने, अकाउंट प्रतिबंधित करने और सरकारी निर्देशों के पालन को लेकर चर्चा चल रही है। कार्यकर्ताओं और कुछ राजनीतिक समूहों का आरोप है कि बेरोजगारी, शासन व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं जैसे मुद्दों पर सवाल उठाने वाले अकाउंट और पोस्ट भी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं। हालांकि, प्रत्येक मामले में कार्रवाई के कारण और कानूनी आधार अलग हो सकते हैं।
सोशल मीडिया कार्रवाई पर अभिजीत दीपके ने क्या कहा?
अभिजीत दीपके ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि इंस्टाग्राम पर कार्रवाई करने से समस्या का मूल कारण समाप्त नहीं होगा। उनके मुताबिक, सोशल मीडिया लोगों के सवाल और असंतोष सामने रखने का माध्यम है। अगर किसी अकाउंट या पोस्ट को हटा दिया जाता है, तो भी उसके पीछे मौजूद वास्तविक मुद्दे बने रहते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि लगातार प्रतिबंध लगाने से उन लोगों में अविश्वास बढ़ सकता है, जो सरकार से जवाब चाहते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सामग्री हटाने को लेकर बहस में शामिल कार्यकर्ताओं का तर्क है कि पेपर लीक, रोजगार के अवसर और संस्थागत पारदर्शिता जैसे मुद्दों का समाधान केवल ऑनलाइन पोस्ट हटाने से नहीं हो सकता।
इस मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत सामग्री प्रतिबंधित करने के निर्देशों का भी संदर्भ सामने आया है। यह प्रावधान केंद्र सरकार को निर्धारित कानूनी आधारों और प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन सामग्री तक सार्वजनिक पहुंच रोकने का अधिकार देता है। किसी विशेष कार्रवाई की वैधता का आकलन उसके आदेश और संबंधित तथ्यों के आधार पर किया जाता है।
‘Bring Back Ballot’ इंस्टाग्राम अकाउंट पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई
इस विवाद के बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने 27 अक्टूबर को भारत में इंस्टाग्राम हैंडल @bring_back__ballot को प्रतिबंधित किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र सरकार और संबंधित विभाग को नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने मामले में जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 6 नवंबर के लिए निर्धारित की गई है।
यह हैंडल ‘Bring Back Ballot’ पहल से जुड़ा है, जिसका संबंध मिशन सेव कॉन्स्टिट्यूशन और इसके राष्ट्रीय संयोजक अधिवक्ता महमूद प्राचा से बताया गया है। याचिका के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दिन अकाउंट भारत में उपलब्ध नहीं रहा। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि स्क्रीन पर यह संदेश दिखाई दिया कि कानूनी अनुरोध का पालन करते हुए भारत में सामग्री को प्रतिबंधित किया गया है।
याचिका में दावा किया गया है कि अकाउंट को बंद करने से पहले याचिकाकर्ताओं को कोई नोटिस, सुनवाई का अवसर, कारण या संबंधित आदेश की प्रति नहीं दी गई। यह याचिका अधिवक्ता निखिल गुलियानी के माध्यम से दायर की गई, जबकि याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सनावर चौधरी ने अदालत में पक्ष रखा।
बैलेट पेपर की मांग और कानूनी प्रक्रिया पर नजर
याचिका के मुताबिक, संबंधित इंस्टाग्राम हैंडल चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के स्थान पर बैलेट पेपर से मतदान की मांग को लेकर अभियान चला रहा था। अभियान का नारा ‘EVM हटाओ देश बचाओ’ बताया गया है। इसी सिलसिले में 10 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आयोजित किया गया था। याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रदर्शन की जानकारी 9 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस को पहले ही दे दी गई थी।
सुनवाई के दौरान मेटा की ओर से अधिवक्ता अमी राणा और केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय सरकारी वकील आशीष दीक्षित उपस्थित हुए। केंद्र की ओर से गृह मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा संबंधित नामित अधिकारी की तरफ से नोटिस स्वीकार किया गया।
अब मामले में केंद्र सरकार के जवाब और अदालत की आगे की कार्यवाही पर नजर रहेगी। फिलहाल, अकाउंट प्रतिबंधित किए जाने को लेकर याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं आया है।

