कैमूर में 51 मुंडों वाली मां दुर्गा की प्रतिमा ने खींचा सबका ध्यान
बिहार के कैमूर जिले में शारदीय नवरात्र के अवसर पर दुर्गा पूजा की रौनक देखने को मिल रही है। यहां 51 मुंडों वाली मां दुर्गा की भव्य सुनहरी प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। वीर नवचंडिका दल दुर्गा पूजा समिति की ओर से स्थापित इस प्रतिमा में मां दुर्गा को शंख पर विराजमान दिखाया गया है। प्रतिमा को भारत के 51 शक्तिपीठों का प्रतीक बताया जा रहा है। इसके साथ ही अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर तैयार भव्य पूजा पंडाल भी लोगों का ध्यान खींच रहा है।
नवरात्र के पावन अवसर पर कैमूर में विभिन्न पूजा समितियां आकर्षक सजावट और विशेष धार्मिक आयोजनों के जरिए भक्तों को आकर्षित कर रही हैं। कहीं रंग-बिरंगी रोशनी से पंडाल सजाए गए हैं, तो कहीं देवी की अनूठी प्रतिमाएं लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
51 मुंडों वाली मां दुर्गा की प्रतिमा क्यों है खास?
वीर नवचंडिका दल दुर्गा पूजा समिति की ओर से स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा अपनी अनूठी बनावट के कारण खास पहचान बना रही है। सुनहरे रंग की इस प्रतिमा में मां को शंख पर विराजमान दिखाया गया है। प्रतिमा के नीचे गर्जना करते सिंहों का दृश्य इसकी भव्यता को और बढ़ाता है।
समिति के अनुसार, प्रतिमा के 51 मुंडे भारत के 51 शक्तिपीठों के प्रतीक हैं। यही वजह है कि इस प्रतिमा को देखने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता है। भक्त माता के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
धार्मिक आस्था से जुड़ी यह प्रस्तुति नवरात्र के दौरान देवी के विभिन्न स्वरूपों और शक्तिपीठों की परंपरा की याद दिलाती है। प्रतिमा की विशिष्ट बनावट पूजा आयोजन को अलग पहचान दे रही है।
65-66 वर्षों से चली आ रही पूजा की परंपरा
वीर नवचंडिका दल दुर्गा पूजा समिति के अनुसार, यहां लगभग 65 से 66 वर्षों से लगातार मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जा रही है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई है।
हर वर्ष समिति पूजा का आयोजन करती है। इस बार 51 मुंडों वाली प्रतिमा स्थापित करके आयोजन को विशेष रूप दिया गया है। समिति के सदस्यों का कहना है कि इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया है।
लंबे समय से आयोजित हो रही पूजा स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक उत्सव के साथ सामुदायिक सहभागिता का अवसर भी है। इसमें समिति के सदस्य मिलकर तैयारियों और आयोजन की जिम्मेदारियां संभालते हैं।
राम मंदिर की तर्ज पर बना भव्य पूजा पंडाल
कैमूर में इस बार दुर्गा पूजा के दौरान अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर बनाए गए पंडाल भी आकर्षण का केंद्र हैं। भव्य सजावट और रंगीन रोशनी से सजे पूजा स्थल श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रहे हैं।
राम मंदिर की शैली से प्रेरित पंडाल धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को उत्सव के साथ जोड़ने का प्रयास है। ऐसे पंडालों में श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन के साथ सजावट और निर्माण शैली को भी देखते हैं।
नवरात्र के अंतिम दिनों में पूजा स्थलों पर भक्तों की आवाजाही बढ़ने की संभावना रहती है। हालांकि, कैमूर के किसी विशेष पंडाल में श्रद्धालुओं की वास्तविक संख्या और भीड़ की स्थिति की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
पूजा समिति दे रही सामाजिक एकता का संदेश
इस आयोजन की एक महत्वपूर्ण विशेषता सामाजिक सहभागिता भी है। समिति के एक सदस्य के मुताबिक, पूजा आयोजन में विभिन्न जातियों और वर्गों के लोग मिलकर भाग लेते हैं। समिति का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता को बढ़ावा देना है।
पूजा समिति ने लोगों से महानवमी और दशहरा का पर्व उत्साह के साथ शांतिपूर्ण तरीके से मनाने की अपील की है। सामूहिक आयोजन लोगों को एक साथ आने और स्थानीय परंपराओं से जुड़ने का अवसर देता है।
समिति का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में आपसी सहयोग और सद्भाव को मजबूत करने का प्रयास किया जाता है। अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों की भागीदारी इस आयोजन को सामुदायिक स्वरूप देती है।
युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश
वीर नवचंडिका दल दुर्गा पूजा समिति धार्मिक कार्यक्रम के साथ युवाओं को सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी कर रही है। समिति की ओर से युवाओं को सूखे नशे के दुष्प्रभावों से दूर रहने और अपने भविष्य पर ध्यान देने का संदेश दिया जा रहा है।
नशे की लत व्यक्ति की सेहत, पढ़ाई, रोजगार और पारिवारिक जीवन को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में युवाओं को खेल, शिक्षा, कौशल विकास और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना महत्वपूर्ण है।
पूजा समिति का यह संदेश धार्मिक उत्सव को सामाजिक जागरूकता से जोड़ता है। इससे आयोजन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज के लिए उपयोगी संदेश देने का माध्यम भी बनता है।
कैमूर की दुर्गा पूजा में आस्था और संस्कृति का संगम
कैमूर में 51 मुंडों वाली मां दुर्गा की प्रतिमा, राम मंदिर की तर्ज पर बना पंडाल और दशकों पुरानी पूजा परंपरा इस आयोजन की प्रमुख विशेषताएं हैं। धार्मिक प्रतीकों के जरिए श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के साथ समिति सामाजिक एकता और नशामुक्त जीवन का संदेश भी दे रही है।
नवरात्र के इस पावन अवसर पर श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। वीर नवचंडिका दल की पूजा परंपरा स्थानीय धार्मिक संस्कृति और सामुदायिक भागीदारी का उदाहरण प्रस्तुत करती है।

