भारत दौरे पर आ रहे लिकटेंस्टाइन के प्रिंस एलोइस, PM मोदी से होगी अहम मुलाकात
नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय देश लिकटेंस्टाइन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के लिए एक अहम कूटनीतिक दौरा होने जा रहा है। लिकटेंस्टाइन के कार्यवाहक राष्ट्राध्यक्ष और उत्तराधिकारी राजकुमार प्रिंस एलोइस 25 से 28 अक्टूबर तक भारत की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को इसकी जानकारी दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा में प्रिंस एलोइस के साथ उनकी पत्नी हेरिडिटरी प्रिंसेस सोफी, उच्चस्तरीय आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल और प्रमुख उद्योगपतियों का कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी आएगा। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, विज्ञान, तकनीक और लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करना है।
भारत और लिकटेंस्टाइन के बीच यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के देशों के साथ आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के नए अवसर सामने आए हैं।
पीएम मोदी और प्रिंस एलोइस के बीच किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रिंस एलोइस द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और सहयोग के नए क्षेत्रों की संभावनाओं पर बातचीत होगी।
बैठक में व्यापार एवं निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहेंगे। इसके साथ ही दोनों पक्ष लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने और क्षेत्रीय तथा वैश्विक घटनाक्रमों पर विचार साझा करेंगे।
इस यात्रा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी प्रिंस एलोइस से मुलाकात करेंगी। राष्ट्रपति उनके सम्मान में एक आधिकारिक भोज का आयोजन भी करेंगी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी लिकटेंस्टाइन के राजकुमार से मुलाकात करेंगे।
कारोबारी प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी को देखते हुए इस दौरे में उद्योग और निवेश से जुड़े मुद्दों पर भी विशेष ध्यान रहने की संभावना है। हालांकि, किसी विशेष समझौते या निवेश की घोषणा के बारे में विदेश मंत्रालय ने अभी कोई विवरण नहीं दिया है।
भारत-EFTA समझौते से आर्थिक सहयोग को मिल सकता है बढ़ावा
भारत और लिकटेंस्टाइन के संबंधों में आर्थिक सहयोग एक महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरा है। लिकटेंस्टाइन यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यानी EFTA का सदस्य है। इस संगठन में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और आइसलैंड भी शामिल हैं।
भारत और EFTA के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता 2025 में लागू हुआ। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक गतिविधियों और निवेश सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाएं बढ़ी हैं। विदेश मंत्रालय को उम्मीद है कि प्रिंस एलोइस की यात्रा से भारत-लिकटेंस्टाइन संबंधों को अतिरिक्त गति मिलेगी।
इस समझौते के व्यापक संदर्भ में उद्योग, तकनीकी सहयोग और निवेश से जुड़े अवसरों पर चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है। दोनों देशों के कारोबारी प्रतिनिधियों की भागीदारी से आपसी व्यापारिक हितों को समझने और नए सहयोग क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा दोनों देशों को पारस्परिक हित के नए क्षेत्रों में साझेदारी विकसित करने का अवसर प्रदान करेगी। इससे मौजूदा मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में काम किया जा सकेगा।
2026 में दूसरी बार भारत आ रहे हैं प्रिंस एलोइस
प्रिंस एलोइस का यह वर्ष 2026 में दूसरा भारत दौरा होगा। इससे पहले वह फरवरी में नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit में शामिल होने आए थे। उस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और प्रिंस एलोइस के बीच हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय मुलाकात हुई थी।
इससे पहले भी वह 2010 और 2018 में भारत का दौरा कर चुके हैं। भारत और लिकटेंस्टाइन ने वर्ष 1993 में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। वर्ष 2023 में दोनों देशों ने राजनयिक संबंधों की स्थापना के 30 वर्ष पूरे किए।
लिकटेंस्टाइन यूरोप का एक छोटा देश है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में इसकी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में प्रिंस एलोइस की यात्रा भारत के साथ आर्थिक, तकनीकी और कूटनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर मानी जा रही है।
अब सभी की नजरें प्रधानमंत्री मोदी और प्रिंस एलोइस की बैठक पर रहेंगी, जहां होने वाली बातचीत से दोनों देशों के भविष्य के सहयोग की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

