फ्रेंच ओपन फाइनल में हारीं पीवी सिंधु, फिर भी भविष्य को लेकर आश्वस्त
भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु को फ्रेंच ओपन 2026 के महिला एकल फाइनल में हार का सामना करना पड़ा। पेरिस में खेले गए खिताबी मुकाबले में दो बार की ओलंपिक पदक विजेता सिंधु को दक्षिण कोरिया की विश्व नंबर-1 खिलाड़ी एन से यंग ने तीन गेम तक चले मुकाबले में हराया। इस हार के साथ सिंधु को उपविजेता बनकर संतोष करना पड़ा।
एरिना ग्रैंड पेरिस में खेले गए फाइनल में सिंधु ने शानदार शुरुआत की और पहला गेम अपने नाम किया। हालांकि, इसके बाद कोरियाई खिलाड़ी ने जोरदार वापसी करते हुए लगातार दो गेम जीत लिए। मुकाबले का अंतिम स्कोर 21-16, 11-21, 12-21 रहा। एन से यंग ने करीब 61 मिनट तक चले मैच में जीत दर्ज कर फ्रेंच ओपन का चौथा खिताब अपने नाम किया।
फाइनल में हार के बावजूद सिंधु ने अपने प्रदर्शन पर संतोष जताया। उन्होंने माना कि शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ हर अंक पर पूरी ताकत लगानी पड़ती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनके खेल में सुधार की काफी गुंजाइश बाकी है।
सिंधु ने जीता पहला गेम, फिर एन से यंग ने की वापसी
मुकाबले की शुरुआत में पीवी सिंधु आक्रामक अंदाज में नजर आईं। उन्होंने कोर्ट पर अच्छी पकड़ बनाई और अपने शॉट्स से एन से यंग को चुनौती दी। शुरुआती गलतियों का फायदा उठाते हुए भारतीय खिलाड़ी ने स्कोर बराबर किया और 11-11 के बाद बढ़त बनाकर पहला गेम 21-16 से जीत लिया।
करियर में दोनों खिलाड़ियों के बीच हुई पिछली भिड़ंतों को देखते हुए यह शुरुआत सिंधु के लिए अहम थी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यह केवल दूसरी बार था जब सिंधु एन से यंग के खिलाफ किसी मुकाबले में एक गेम जीतने में सफल रहीं।
दूसरे गेम में दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी ने अपनी रणनीति बदली। उन्होंने रैली में निरंतरता बनाए रखी और सिंधु को अंक बनाने के कम मौके दिए। एन से यंग ने 21-11 से गेम जीतकर मुकाबला बराबर कर दिया। निर्णायक गेम में स्कोर 9-9 होने तक दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर रही, लेकिन इसके बाद कोरियाई शटलर ने बढ़त बना ली और 21-12 से गेम जीत लिया।
हार के बाद बोलीं सिंधु- अभी सुधार की काफी गुंजाइश
मैच के बाद सिंधु ने कहा कि दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने के लिए हर अंक पर अपना सर्वश्रेष्ठ देना जरूरी है। उन्होंने माना कि मुकाबला आसान नहीं था और पूरे मैच में संघर्ष करना पड़ता है। उनके मुताबिक, टीम और खिलाड़ी की ओर से हर अंक के लिए लड़ने की कोशिश की गई।
सिंधु ने अपने प्रदर्शन को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि वह इससे खुश हैं, लेकिन उनका लक्ष्य आगामी टूर्नामेंटों में और बेहतर बैडमिंटन खेलना है। उनके बयान से साफ है कि वह इस हार को आगे सुधार करने के अवसर के रूप में देख रही हैं।
2026 में सिंधु का दूसरा सुपर 750 फाइनल
फ्रेंच ओपन का फाइनल इस सीजन में सिंधु का BWF वर्ल्ड टूर सुपर 750 स्तर पर दूसरा खिताबी मुकाबला था। इससे पहले उन्होंने जुलाई में जापान ओपन का खिताब जीता था। फ्रेंच ओपन में फाइनल तक पहुंचना उनके लिए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।
भारतीय बैडमिंटन के लिहाज से भी 2026 का सीजन खास रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस वर्ष भारत के खिलाड़ियों ने देश के बाहर BWF वर्ल्ड टूर सुपर 300 या उससे ऊंचे स्तर के टूर्नामेंटों में कुल 10 बार फाइनल में जगह बनाई। इस तरह भारतीय खिलाड़ियों ने 2023 में दर्ज नौ फाइनल के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
हालांकि, फ्रेंच ओपन का खिताब सिंधु के हाथ नहीं लगा, लेकिन फाइनल तक का सफर उनके लिए सकारात्मक संकेत है। अब उनकी नजर आगामी प्रतियोगिताओं पर होगी, जहां वह अपनी कमियों को दूर करके बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगी।

