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तिरंगे के मुद्दे पर संजय राउत का बड़ा बयान, सुप्रीम कोर्ट से लगाई गुहार

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महाराष्ट्र की राजनीति में सक्रिय शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करने की अपील की है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के प्रयास से जुड़े मामले में कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के बाद उन्होंने यह बयान दिया।

20 अक्टूबर को मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने मौजूदा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आशंका जताई कि यदि वर्तमान सरकार सत्ता में बनी रहती है, तो देश में अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा जताते हुए कहा कि शीर्ष अदालत को इस मामले पर ध्यान देना चाहिए।

राउत ने राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अधिकार से जुड़ा सवाल भी उठाया। उनके बयान के बाद जंतर-मंतर पर हुई कार्रवाई और दोनों नेताओं की हिरासत का मामला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में आ गया है।

संजय राउत ने सुप्रीम कोर्ट से क्यों की हस्तक्षेप की अपील?

संजय राउत ने कहा कि देश में तिरंगा फहराने को लेकर ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए, जहां लोगों को इस पर सवाल उठाना पड़े। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले का संज्ञान लेने और हस्तक्षेप करने की अपील की।

राउत ने अपने बयान में कहा कि अगर देश में अपने राष्ट्रीय ध्वज को फहराना संभव नहीं है, तो यह गंभीर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने मौजूदा सरकार की कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए चेतावनी दी कि ऐसी परिस्थितियां आगे चलकर अव्यवस्था को बढ़ावा दे सकती हैं।

हालांकि, ये संजय राउत के राजनीतिक बयान और उनकी मांग हैं। अदालत इस मामले में क्या निर्णय लेती है, यह संबंधित कानूनी प्रक्रिया और तथ्यों पर निर्भर करेगा।

सौरव दास और आशुतोष रंका की न्यायिक हिरासत बढ़ी

इस मामले में कॉकroach जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रंका की न्यायिक हिरासत दो दिनों के लिए बढ़ा दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी शुरुआती पांच दिनों की न्यायिक हिरासत सोमवार को समाप्त हो गई थी। इसके बाद दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन स्थित विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत ने हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ाने का आदेश दिया।

दोनों नेताओं के वकीलों के अनुसार, जमानतदार से संबंधित दस्तावेजों में कथित विसंगति के कारण उनकी जमानत स्वीकार नहीं हुई। इसके बाद उन्हें मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन से वापस न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

इससे पहले पुलिस द्वारा जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थल घोषित किए जाने के बावजूद वहां पहुंचने के मामले में दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। आरोपों के अनुसार, उन्होंने निषेधाज्ञा लागू होने के दौरान वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराने का प्रयास किया था।

मामले में निषेधाज्ञा और प्रदर्शन से जुड़े नियम महत्वपूर्ण हैं। वहीं, तिरंगे के सम्मान और उसे फहराने के अधिकार को लेकर राजनीतिक दलों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं।

अरविंद केजरीवाल ने भी पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी दोनों नेताओं के खिलाफ हुई कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर सवाल उठाया कि क्या अपने ही देश में राष्ट्रीय ध्वज लहराना अपराध है।

केजरीवाल ने पुलिस की कार्रवाई को अनुचित बताते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। इस तरह, सौरव दास और आशुतोष रंका की हिरासत का मामला विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाओं के कारण राजनीतिक बहस का विषय बन गया।

विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े मुद्दे पर सवाल उठाए हैं, जबकि मामले की कानूनी स्थिति का निर्धारण संबंधित आदेशों और लागू नियमों के आधार पर होगा।

फिलहाल, दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है। इस घटनाक्रम में आगे अदालत की कार्रवाई और संबंधित पक्षों के तर्क महत्वपूर्ण रहेंगे।

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