शिवहर में बच्चू जी ने की मां दुर्गा की पूजा, दिया बड़ा संदेश
शिवहर: राजद नेता और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी राधाकांत गुप्ता उर्फ बच्चू जी ने शिवहर शहर सहित जिले के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों में पहुंचकर मां भगवती की पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने जिले के लोगों के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। शिवहर में राधाकांत गुप्ता उर्फ बच्चू जी ने दुर्गा पूजा के धार्मिक महत्व पर चर्चा करते हुए इसे बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह लोगों को साहस, शक्ति और सकारात्मक सोच की प्रेरणा भी देता है। इस त्योहार के माध्यम से समाज में आपसी मेल-जोल और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।
मां भगवती की स्तुति कर व्यक्त की श्रद्धा
पूजा पंडालों में मां दुर्गा के दर्शन के दौरान राधाकांत गुप्ता उर्फ बच्चू जी ने देवी की स्तुति करते हुए अपनी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने मां भगवती की महिमा का वर्णन करने वाली संस्कृत पंक्तियां भी प्रस्तुत कीं।
उन्होंने कहा—
जय भगवति देवि नमो वरदे, जय पापविनाशिनि बहुफलदे।
जय शुम्भनिशुम्भकपालधरे, प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे॥
इस स्तुति में देवी को वरदान देने वाली, पापों का नाश करने वाली और भक्तों के कष्ट दूर करने वाली शक्ति के रूप में नमन किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा की आराधना से भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए साहस और आत्मबल की प्रेरणा मिलती है।
महिषासुर वध की कथा से जुड़ा है दुर्गा पूजा का महत्व
राधाकांत गुप्ता ने बताया कि दुर्गा पूजा का संबंध मां दुर्गा और महिषासुर के बीच हुए पौराणिक युद्ध से है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध कर देवताओं और संसार को उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाई थी।
यह कथा संदेश देती है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म की विजय होती है। इसी कारण नवरात्र और दुर्गा पूजा को शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक माना जाता है।
नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त इन दिनों उपवास, मंत्र जाप, आरती और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से देवी की आराधना करते हैं।
भगवान श्रीराम और विजयदशमी से भी जुड़ी है मान्यता
राजद नेता बच्चू जी ने दुर्गा पूजा की परंपरा का उल्लेख करते हुए भगवान श्रीराम से जुड़ी धार्मिक मान्यता पर भी चर्चा की। मान्यता है कि रावण के विरुद्ध युद्ध से पहले भगवान श्रीराम ने मां दुर्गा की विशेष आराधना की थी।
इस परंपरा को अकाल बोधन के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, देवी की उपासना के बाद श्रीराम को रावण पर विजय प्राप्त हुई। इसी वजह से विजयदशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है।
यह पर्व लोगों को अन्याय का विरोध करने, सत्य का साथ देने और जीवन में अच्छे आचरण को अपनाने की प्रेरणा देता है। देश के विभिन्न हिस्सों में विजयदशमी अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाई जाती है।
पूजा पंडालों में दिखती है भारतीय कला और संस्कृति की झलक
राधाकांत गुप्ता उर्फ बच्चू जी ने दुर्गा पूजा के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पूजा पंडाल समाज के विभिन्न वर्गों, परिवारों और पीढ़ियों को एक साथ आने का अवसर देते हैं।
दुर्गा पूजा के दौरान आकर्षक पंडाल, मां दुर्गा की सुसज्जित प्रतिमाएं, पारंपरिक संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों के आकर्षण का केंद्र बनते हैं। कई स्थानों पर कलाकार अपनी कारीगरी के माध्यम से धार्मिक कथाओं और भारतीय परंपराओं को प्रस्तुत करते हैं।
धार्मिक आयोजनों के जरिए स्थानीय कलाकारों, कारीगरों और पूजा समितियों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। इस तरह दुर्गा पूजा आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में भी भूमिका निभाती है।
शिवहर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना
शिवहर शहर सहित जिले के विभिन्न पूजा पंडालों में मां भगवती की पूजा-अर्चना के बीच श्रद्धालु परिवार और समाज की खुशहाली की कामना कर रहे हैं। राधाकांत गुप्ता उर्फ बच्चू जी ने भी मां दुर्गा से जिले में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की।
दुर्गा पूजा जैसे त्योहार सामाजिक एकता और आपसी सहयोग को मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे आयोजनों में लोगों की भागीदारी से स्थानीय परंपराओं को बढ़ावा मिलता है और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिलता है।
बच्चू जी का पूजा पंडालों में पहुंचकर मां भगवती की आराधना करना इसी धार्मिक उत्साह का हिस्सा रहा। उनके संदेश में देवी की शक्ति, धर्म की विजय और समाज की सुख-शांति की कामना प्रमुख रही।

