राहुल गांधी के बरी होते ही प्रियंका का बड़ा बयान, बोलीं- सच दब नहीं सकता
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत से बड़ी कानूनी राहत मिली है। वर्ष 2018 के आपराधिक मानहानि मामले में अदालत ने उन्हें बरी कर दिया। इस फैसले के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सच्चाई को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने अपने भाई के खिलाफ कथित तौर पर चलाए गए अभियान को लेकर सरकार पर भी निशाना साधा।
प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर राहुल गांधी के संघर्ष और हिम्मत की सराहना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोगों ने राहुल गांधी की छवि खराब करने और उन्हें बदनाम करने के लिए लगातार प्रयास किए। प्रियंका के अनुसार, राहुल गांधी ने राजनीतिक और कानूनी दबाव के बावजूद अपनी बात रखने का साहस दिखाया है।
उनके बयान के बाद कांग्रेस समर्थकों और राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अदालत का निर्णय एक विशेष आपराधिक मानहानि शिकायत से संबंधित है।
प्रियंका गांधी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
राहुल गांधी के बरी होने पर प्रियंका गांधी ने कहा कि सच को हमेशा के लिए दबाकर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने अपने पोस्ट में आरोप लगाया कि उनके भाई को सच बोलने के कारण निशाना बनाया गया और उनके खिलाफ ऐसे मामले दर्ज कराए गए, जिन्हें वह निराधार मानती हैं।
प्रियंका ने राहुल गांधी के धैर्य, साहस और लगातार संघर्ष करने की क्षमता की तारीफ की। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में सच्चाई सामने आएगी। उनके मुताबिक, यह फैसला उस प्रक्रिया की शुरुआत है, जिसमें झूठ और सच्चाई के बीच अंतर स्पष्ट होगा।
कांग्रेस सांसद की इस प्रतिक्रिया को पार्टी की ओर से राहुल गांधी के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, सरकार पर लगाए गए आरोप प्रियंका गांधी के राजनीतिक बयान हैं, जबकि अदालत का फैसला संबंधित मामले के कानूनी तथ्यों और प्रावधानों पर आधारित है।
क्या था राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला?
यह मामला वर्ष 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी द्वारा बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए कथित बयान से जुड़ा था। उस समय भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेता विजय मिश्रा ने अगस्त 2018 में राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी ने तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की थी। इस शिकायत के बाद मामला कानूनी प्रक्रिया से गुजरता रहा और अंततः सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत में इसकी सुनवाई हुई।
26 अक्टूबर को विशेष न्यायाधीश शुभम वर्मा ने राहुल गांधी को इस मामले में बरी कर दिया। न्यायाधीश ने अक्टूबर में मामले की अंतिम दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया। अदालत के अनुसार, संबंधित टिप्पणियां भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत आपराधिक मानहानि का अपराध साबित नहीं करती थीं। अदालत ने यह भी माना कि शिकायतकर्ता कानूनी रूप से ऐसा व्यक्ति नहीं था, जिसे इस मामले में शिकायत दर्ज कराने का अधिकार प्राप्त हो।
‘सत्यम शिवम सुंदरम’ पोस्ट भी चर्चा में
अदालत के फैसले के बाद राहुल गांधी की सोशल मीडिया गतिविधि भी चर्चा में रही। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ संस्कृत वाक्यांश साझा किया। इसके साथ भगवान शिव के त्रिपुंड तिलक से मिलता-जुलता एक ग्राफिक भी दिखाई दिया।
इस पोस्ट को उनके समर्थकों ने सत्य और नैतिकता से जोड़कर देखा। वहीं, प्रियंका गांधी के बयान ने इस कानूनी घटनाक्रम को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
राहुल गांधी को इस मामले में राहत मिलने के बाद कांग्रेस के लिए यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हालांकि, इस फैसले का दायरा इसी मानहानि मामले तक सीमित है। इसे अन्य मामलों में किसी निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

