गुजरात की बनास डेयरी में नई तकनीक का कमाल, ₹31 करोड़ से बनेगा स्मार्ट वेयरहाउस
गुजरात के डेयरी उद्योग को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के पालनपुर स्थित बनास डेयरी के UHT प्लांट में स्थापित आधुनिक ऑटोमेटेड स्टोरेज एंड रिट्रीवल सिस्टम (ASRS) का उद्घाटन करेंगे। इस परियोजना पर 31.14 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। नई व्यवस्था से दूध और दुग्ध उत्पादों को सुरक्षित रखने, उनकी पहचान करने और बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया पहले से अधिक तेज और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।
गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, इस आधुनिक वेयरहाउस में नौ स्तर तक ऊंचे स्टील रैक लगाए गए हैं। इसमें एक साथ 11,000 पैलेट रखने की क्षमता है। पैलेट पर दूध और अन्य उत्पादों के पैकेट या कार्टन व्यवस्थित तरीके से रखे जाते हैं, ताकि उन्हें जरूरत के समय आसानी से निकाला जा सके।
इस सिस्टम की खासियत यह है कि सामान को रखने और निकालने के लिए कर्मचारियों को हर बार गोदाम के भीतर जाकर खोजबीन नहीं करनी पड़ेगी। मशीनें और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर मिलकर पूरे काम को नियंत्रित करेंगे।
क्या है ASRS तकनीक और कैसे करेगी काम?
ऑटोमेटेड स्टोरेज एंड रिट्रीवल सिस्टम यानी ASRS एक ऐसी तकनीक है, जिसमें मशीनों की मदद से सामान को निर्धारित स्थान पर रखा जाता है और जरूरत पड़ने पर अपने आप बाहर निकाला जाता है। इसमें क्रेन, शटल, कन्वेयर और विशेष सॉफ्टवेयर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
पालनपुर के वेयरहाउस में ‘मदर-चाइल्ड’ शटल व्यवस्था अपनाई गई है। इसमें मदर शटल छोटी चाइल्ड शटल को रैक के निर्धारित हिस्से तक पहुंचाती है। इसके बाद चाइल्ड शटल संबंधित पैलेट को तय स्थान पर रखती है या जरूरत पड़ने पर बाहर निकालती है।
इस प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और सामान गलत जगह रखने की आशंका भी घटेगी। कंप्यूटर सिस्टम प्रत्येक पैलेट की लोकेशन दर्ज करेगा। इससे किसी खास उत्पाद या बैच को ढूंढना और डिस्पैच क्षेत्र तक पहुंचाना आसान होगा।
पारंपरिक गोदामों में फोर्कलिफ्ट से सामान उठाने और रखने के लिए चौड़े रास्तों की जरूरत होती है। इसके अलावा, सीमित ऊंचाई तक सामान रखने और कर्मचारियों द्वारा रिकॉर्ड संभालने में समय लगता है। नई तकनीक इन चुनौतियों को कम करने में मदद करेगी।
रोज 5.5 लाख लीटर दूध प्रोसेस करता है UHT प्लांट
बनास डेयरी का पालनपुर स्थित UHT प्लांट वर्ष 2015 में स्थापित किया गया था। यहां दूध को विशेष ताप उपचार प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इस तकनीक से तैयार उत्पादों को बिना रेफ्रिजरेशन के छह महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है, बशर्ते पैकेजिंग सही हो और उत्पाद के निर्धारित भंडारण निर्देशों का पालन किया जाए।
इस प्लांट में प्रतिदिन लगभग 5.5 लाख लीटर दूध प्रोसेस किया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में इससे 1,050 करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व दर्ज किया गया। यहां तैयार दूध, छाछ, घी, प्रोटीन पेय और अन्य उत्पाद देश के विभिन्न बाजारों में भेजे जाते हैं।
इन उत्पादों में ‘काउ-बफैलो गोल्ड’, ‘हाई प्रोटीन लस्सी’, ‘एप्पल ट्रू’ और ‘टी स्पेशल’ जैसे ब्रांड शामिल हैं। प्लांट के उत्पाद सिंगापुर, मालदीव, संयुक्त अरब अमीरात और मलेशिया जैसे देशों में भी निर्यात किए जाते हैं। नई भंडारण व्यवस्था से तैयार उत्पादों के प्रबंधन और समय पर आपूर्ति में सुधार की उम्मीद है।
लाखों पशुपालक किसानों से जुड़ी है बनास डेयरी
बनास डेयरी की स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी। यह बनासकांठा क्षेत्र के पशुपालकों और ग्रामीण दुग्ध सहकारी समितियों के साथ मिलकर काम करती है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, डेयरी प्रतिदिन औसतन 83 लाख लीटर दूध एकत्र करती है। इसके नेटवर्क में 1,505 ग्रामीण दुग्ध सहकारी समितियां और 4.5 लाख से अधिक पशुपालक किसान जुड़े हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 में संगठन का वार्षिक कारोबार 21,200 करोड़ रुपये से अधिक रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसके कुल राजस्व का लगभग 82 प्रतिशत हिस्सा किसानों को भुगतान के रूप में लौटाया गया।
नई ASRS परियोजना बनास डेयरी में तकनीकी बदलाव का अगला चरण है। अब तक स्वचालन का मुख्य जोर दूध की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग पर रहा है, जबकि नई व्यवस्था गोदाम और सप्लाई चेन को भी आधुनिक बनाएगी।
इससे उत्पादों की ट्रैकिंग, स्टॉक प्रबंधन और बाजार तक आपूर्ति को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। परियोजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नई प्रणाली उत्पादन और वितरण की गति में कितना सुधार लाती है।

