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बैलेट पेपर से चुनाव कराने की चुनौती, खड़गे ने पीएम मोदी से पूछा- हिम्मत है तो कराइए चुनाव

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नई दिल्ली: देश में चुनाव कराने की प्रक्रिया और बैलेट पेपर के इस्तेमाल को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बैलेट पेपर से लोकसभा चुनाव कराने की चुनौती दी। इसके साथ ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. के आगामी कार्यक्रम में उनके खिलाफ सार्वजनिक विरोध दर्ज कराने की बात कही।

समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में खड़गे ने आरोप लगाया कि चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक परंपराओं को लेकर विपक्ष की चिंताओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व पर भी निशाना साधा। हालांकि, ये खड़गे के राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी पुष्टि के लिए संबंधित तथ्यों और आधिकारिक पक्ष को देखना जरूरी है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग का मजाक उड़ाने के बजाय सरकार को इस पर फैसला लेना चाहिए। उन्होंने संसद भंग कर बैलेट पेपर के माध्यम से लोकसभा चुनाव कराने की चुनौती दी। उनके बयान से चुनावी प्रक्रिया को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक टकराव फिर चर्चा में आ गया है।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी कार्यक्रम में उठेगा मुद्दा

खड़गे के मुताबिक, विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. के शुक्रवार को प्रस्तावित कार्यक्रम में सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को लेकर अपनी चिंताएं रखेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी व्यवस्था से जुड़े कुछ फैसले लोकतांत्रिक मानकों पर सवाल खड़े करते हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने इस मुद्दे को विपक्ष की व्यापक राजनीतिक रणनीति से जोड़ते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखना जरूरी है। हालांकि, उपलब्ध खबर में प्रस्तावित सार्वजनिक विरोध की औपचारिक प्रक्रिया, उसके कानूनी स्वरूप या कार्यक्रम के अंतिम निर्णयों की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

खड़गे ने यह भी कहा कि राजनीतिक चर्चा का केंद्र महंगाई, बेरोजगारी और युवाओं की समस्याएं होनी चाहिए। उनके अनुसार, इन मुद्दों पर बहस करने के बजाय राजनीतिक दलों की चुनावी स्थिति को लेकर बयानबाजी की जा रही है। उन्होंने कांग्रेस की स्थिति पर की जा रही टिप्पणियों का भी विरोध किया।

ब्रिंदा करात ने भी बैलेट पेपर के मुद्दे पर उठाए सवाल

सीपीआई (एम) नेता ब्रिंदा करात ने भी बैलेट पेपर से हुए चुनावों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री की टिप्पणियों पर सवाल उठाए। उन्होंने वाराणसी और नागपुर में हुए विधान परिषद चुनावों का उल्लेख किया और दावा किया कि इन चुनावों में बीजेपी से जुड़े उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा था।

करात ने कहा कि चुनाव परिणामों को लेकर किसी भी राजनीतिक दल को अहंकार नहीं दिखाना चाहिए। उन्होंने चुनावी व्यवस्था में कथित हस्तक्षेप की आशंका भी जताई। उनके बयान विपक्ष की उस मांग को दर्शाते हैं, जिसमें चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर चर्चा की जा रही है।

हालांकि, वाराणसी और नागपुर के चुनाव परिणामों का उल्लेख करते हुए करात ने जो राजनीतिक निष्कर्ष निकाले, वे उनका अपना पक्ष हैं। किसी चुनावी प्रणाली की निष्पक्षता का आकलन करने के लिए केवल कुछ परिणामों के बजाय संबंधित प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों को देखना आवश्यक है।

पीएम मोदी की टिप्पणी के बाद बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी

यह विवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस टिप्पणी के बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने कर्नाटक विधान परिषद चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की जीत का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा था। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा था कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की 28 सीटों पर हुए चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने कांग्रेस की सीटों की संख्या को लेकर सवाल किया था।

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक विधान परिषद चुनावों में एनडीए ने चारों सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसी परिणाम के संदर्भ में प्रधानमंत्री की टिप्पणी और उसके बाद विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाओं ने बैलेट पेपर बनाम मौजूदा चुनावी व्यवस्था की बहस को नया राजनीतिक आयाम दिया है।

फिलहाल, इस मुद्दे पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी मांगें उठा रहे हैं, जबकि राजनीतिक बयानबाजी भी जारी है। आने वाले दिनों में विपक्षी गठबंधन के कार्यक्रम और इस पर सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

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