तिरंगे की तस्वीरें हटाने पर भड़के आदित्य ठाकरे, रायहान वाड्रा का किया समर्थन
राजस्थान के बीकानेर हाउस में आयोजित कला प्रदर्शनी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रूप लेता जा रहा है। शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने गुरुवार, 22 अक्टूबर को कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे और कलाकार रायहान वाड्रा का समर्थन किया। उन्होंने प्रदर्शनी से राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की तस्वीरें हटाने के कथित निर्देश को देशविरोधी कृत्य करार दिया।
आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रियंका गांधी वाड्रा की पोस्ट का जवाब देते हुए रायहान की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीरें प्रदर्शित करने के लिए कलाकार को जिस स्थिति का सामना करना पड़ा, उसके बावजूद उनका अपने फैसले पर कायम रहना सराहनीय है। ठाकरे ने बीकानेर हाउस के प्रबंधन के रवैये पर सवाल उठाते हुए मामले में जवाबदेही तय करने की मांग भी की।
क्या है बीकानेर हाउस प्रदर्शनी विवाद?
विवाद रायहान वाड्रा की कला प्रदर्शनी ‘No Idea Is Final’ से जुड़ा है। रायहान ने बुधवार को इंस्टाग्राम पर दावा किया था कि प्रदर्शनी शुरू होने से कुछ घंटे पहले बीकानेर हाउस प्रबंधन ने उनसे बड़ी संख्या में कलाकृतियां हटाने को कहा। उनके अनुसार, इन तस्वीरों में दिल्ली में हुए युवा प्रदर्शनों और अन्य आंदोलनों से जुड़े दृश्य शामिल थे।
रायहान ने यह भी आरोप लगाया कि प्रबंधन ने तिरंगे की दो तस्वीरें हटाने का निर्देश दिया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीर नहीं हटाएंगे। कलाकार के मुताबिक, प्रदर्शनी को फिलहाल उपलब्ध कलाकृतियों के साथ जारी रखा जाएगा और जरूरत पड़ने पर पूरी तस्वीरों वाली प्रदर्शनी के लिए किसी अन्य स्थान की तलाश की जाएगी।
हालांकि, बीकानेर हाउस मैनेजमेंट सोसाइटी ने गुरुवार को अलग पक्ष रखते हुए कहा कि प्रदर्शनी में मौजूद कुछ तस्वीरें उसकी निर्धारित नीतियों के अनुरूप नहीं पाई गईं। इसलिए उन्हें हटाने का अनुरोध किया गया। सोसाइटी के अनुसार, उसकी नीति के अनुकूल तस्वीरें प्रदर्शनी में बनी हुई हैं।
राजीव शुक्ला ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने भी इस मामले में रायहान वाड्रा का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि रायहान एक कलाकार हैं, जिनके काम में जंगलों, शेरों और विभिन्न स्थानों की तस्वीरें भी शामिल हैं। शुक्ला के मुताबिक, प्रदर्शनी में छात्र आंदोलनों और युवाओं के विरोध प्रदर्शनों से संबंधित तस्वीरें भी रखी गई थीं।
शुक्ला ने आरोप लगाया कि प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर सभी 70 तस्वीरें हटाने की कार्रवाई कार्यक्रम शुरू होने से लगभग चार घंटे पहले की गई। उन्होंने दावा किया कि तस्वीरें तीन दिन पहले मंजूरी के लिए जमा कराई गई थीं और उस समय कोई आपत्ति नहीं जताई गई थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।
कांग्रेस सांसद ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने बीकानेर हाउस के प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अपील भी की।
Well done @raihanrvadra !
Facing a regime that is so scared of even photographs without any descriptions, kudos to you for standing up for the national flag and not taking down the photos that had our 🇮🇳
The management must think whether it truly is Indian. To take down the photos of the National Flag, is an anti national act.
When democracy is reclaimed, the management must face the Indian version of Nuremberg trials for this anti national act.
— Aaditya Thackeray (@AUThackeray) October 22, 2026
तिरंगे की तस्वीरों पर बयान से बढ़ा राजनीतिक टकराव
आदित्य ठाकरे ने अपने बयान में कहा कि राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीरें हटाने के मामले में प्रबंधन को अपनी भूमिका पर विचार करना चाहिए। उन्होंने भविष्य में इस मामले की जवाबदेही तय करने की बात भी कही। उनके बयान से यह विवाद राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
फिलहाल, इस पूरे मामले में कलाकार के आरोप, कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया और बीकानेर हाउस प्रबंधन का स्पष्टीकरण सामने आया है। विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि तस्वीरें हटाने का अनुरोध किन नीतिगत आधारों पर किया गया और क्या प्रदर्शनी की सामग्री को लेकर पहले से कोई आपत्ति दर्ज कराई गई थी। इन सवालों पर स्पष्ट जानकारी सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति बेहतर तरीके से समझी जा सकेगी।

