CJP कार्यकर्ताओं की जमानत प्रक्रिया पूरी, नवंबर में SEM कोर्ट में अगली सुनवाई
नई दिल्ली: कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं अशुतोष रांका, सौरभ दास और अजिंक्य शिंदे से जुड़े मामले में शुक्रवार, 23 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत में जमानतदारों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई। कार्यकर्ताओं के अनुसार, अदालत में यह प्रक्रिया सामान्य रूप से संपन्न हुई और मामले की अगली सुनवाई नवंबर के तीसरे सप्ताह में निर्धारित की गई है।
इस मामले की सुनवाई ऐसे समय हो रही है, जब 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन स्थल से जुड़ी कानूनी शर्तें चर्चा में हैं। अदालत ने पहले ही स्पष्ट किया था कि मामले की जांच और सुनवाई कानून के अनुसार आगे बढ़ेगी।
SEM कोर्ट में जमानतदारों के दस्तावेजों का सत्यापन
CJP कार्यकर्ता अशुतोष रांका, सौरभ दास और अजिंक्य शिंदे शुक्रवार को SEM अदालत में पेश हुए। यहां उनके जमानतदारों से संबंधित विवरणों का सत्यापन किया गया। रांका के मुताबिक, सत्यापन की प्रक्रिया ठीक रही और अदालत ने अगली सुनवाई के लिए नवंबर के तीसरे सप्ताह की तारीख दी है।
इससे पहले अदालत ने सौरभ दास और अशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया था। यह राहत उनके निजी मुचलके और जमानतदारों के बांड स्वीकार किए जाने तथा शांति बनाए रखने के लिखित आश्वासन के बाद मिली थी।
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऋतु राज ने दोनों कार्यकर्ताओं को जांच पूरी होने तक 50-50 हजार रुपये के निजी और जमानती बांड भरने का निर्देश दिया था। साथ ही, उन्हें प्रत्येक सुनवाई पर अदालत में उपस्थित रहने और बांड में निर्धारित शर्तों का पालन करने को कहा गया था।
जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर क्या हैं शर्तें?
अदालत में दिए गए लिखित आश्वासन में दास और रांका ने कहा था कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधियों से दूर रहेंगे। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जंतर-मंतर को निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा विरोध प्रदर्शन स्थल घोषित किए जाने तक वहां प्रदर्शन आयोजित करने का आह्वान नहीं करेंगे।
दोनों ने भविष्य में किसी भी विरोध प्रदर्शन को संवैधानिक दायरे में और कानून के अनुरूप आयोजित करने की बात कही थी। अदालत की ओर से लगाई गई इन शर्तों का पालन करना उनकी रिहाई से जुड़ी कानूनी जिम्मेदारियों का हिस्सा है।
यह मामला 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, संबंधित स्थल को निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया जा चुका था। पुलिस ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शनकारी निजी परिसर के रास्ते उस क्षेत्र में पहुंचे और शांति बनाए रखने से जुड़ी शर्तों का उल्लंघन किया। ये पुलिस के आरोप हैं, जिन पर मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
क्राइम ब्रांच के समन पर भी टिकी नजरें
इस मामले में एक अन्य घटनाक्रम 22 अक्टूबर को सामने आया था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने CJP कार्यकर्ताओं सौरभ दास, अशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पूछताछ के लिए राजौरी गार्डन स्थित कार्यालय में बुलाया था। उन्हें दोपहर 12 बजे जांच में शामिल होने के लिए समन भेजा गया था, लेकिन तीनों उस दिन पूछताछ के लिए नहीं पहुंचे।
रांका ने बताया कि वे निर्धारित तारीख पर क्राइम ब्रांच के कार्यालय नहीं जा सके थे और उन्होंने इस बारे में पुलिस को सूचित कर दिया था। उनके अनुसार, पुलिस की ओर से आगे की तारीख और समय की पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।
फिलहाल, SEM अदालत में जमानतदारों का सत्यापन पूरा हो चुका है और अगली सुनवाई नवंबर के तीसरे सप्ताह में होने की जानकारी कार्यकर्ताओं ने दी है। वहीं, क्राइम ब्रांच की पूछताछ के लिए नई तारीख तय होने का इंतजार है। मामले में आगे की कार्रवाई अदालत और जांच एजेंसी की प्रक्रिया के अनुसार होगी।

