वोट चोरी के आरोप पर कांग्रेस का बड़ा दांव, दिल्ली रैली में 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य
कांग्रेस ने कथित वोट चोरी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ अपना अभियान तेज करने की तैयारी की है। पार्टी ने 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली महारैली में देशभर से 10 लाख नागरिकों और मतदाताओं को जुटाने का लक्ष्य रखा है। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह जानकारी दी।
अलका लांबा ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया से करोड़ों नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित होने का खतरा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपना आंदोलन जारी रखेगी।
कांग्रेस का कहना है कि SIR प्रक्रिया और चुनावी अनियमितताओं से जुड़ी उसकी चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, वोट चोरी और मताधिकार प्रभावित होने के आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेजों, निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया के निष्कर्षों को देखना जरूरी होगा।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और SIR रोकने की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अलका लांबा ने निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई करने और उनके फैसलों को रद्द करने की बात कही।
कांग्रेस नेता ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया रोकने की भी मांग की। इसके साथ ही उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग उठाई।
कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया को लेकर उठ रही चिंताओं का समाधान होना चाहिए, ताकि किसी भी पात्र नागरिक का मतदान का अधिकार प्रभावित न हो। दूसरी ओर, इन आरोपों और मांगों पर निर्वाचन आयोग का पक्ष तथा संबंधित आधिकारिक नियम महत्वपूर्ण होंगे।
अलका लांबा ने कहा कि पार्टी चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को जनता के बीच ले जाएगी। 1 नवंबर की प्रस्तावित रैली को इसी अभियान का प्रमुख हिस्सा माना जा रहा है।
राहुल गांधी के नेतृत्व में राष्ट्रपति से मिलने की तैयारी
अलका लांबा ने बताया कि कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन INDIA के नेताओं के साथ राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगेगी। पार्टी इस मुलाकात के दौरान चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी अपनी चिंताओं और समर्थन में मौजूद दस्तावेजों को प्रस्तुत करना चाहती है।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख कर चुकी है। पार्टी का दावा है कि चुनावी अनियमितताओं से जुड़े सवालों पर संवैधानिक और कानूनी स्तर पर कार्रवाई की जरूरत है।
अलका लांबा ने भाजपा पर कांग्रेस के अभियान और प्रस्तावित महारैली को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, रैली में 10 लाख लोगों की भागीदारी का लक्ष्य पार्टी की ओर से घोषित किया गया है; वास्तविक संख्या कार्यक्रम के बाद ही स्पष्ट होगी।
खरगे के बयान और हल्द्वानी के कथित शुद्धिकरण पर भी विवाद
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अलका लांबा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए गए बयान को लेकर भाजपा की आलोचना पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने महिलाओं के सम्मान और सार्वजनिक जीवन में मर्यादित भाषा के इस्तेमाल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस मामले में सभी नेताओं और राजनीतिक दलों को समान मानदंड अपनाने चाहिए।
उन्होंने उत्तराखंड के हल्द्वानी में खरगे की जनसभा के बाद कथित शुद्धिकरण अनुष्ठान कराए जाने का मुद्दा भी उठाया। अलका लांबा के अनुसार, सभा के बाद हवन और गंगाजल छिड़कने की घटना सामाजिक समानता तथा दलित पृष्ठभूमि से आने वाले नेता के सम्मान को लेकर सवाल खड़े करती है। इस आरोप के स्वतंत्र सत्यापन और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखना जरूरी है।
प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए अलका लांबा ने आरोप लगाया कि व्यक्तिगत और भावनात्मक मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नेताओं को व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप के बजाय जनता की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
कुल मिलाकर, कांग्रेस ने 1 नवंबर की दिल्ली रैली के जरिए मतदाता सूची, SIR और चुनावी प्रक्रिया को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की तैयारी की है। अब इस अभियान को जनता का कितना समर्थन मिलता है और निर्वाचन आयोग इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है, इस पर नजर रहेगी।

