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पटना में खड़गे के बयान पर बवाल, नित्यानंद राय बोले- लोकतंत्र का काला दिन

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बिहार की राजधानी पटना में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक बयान को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में खड़गे की टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने खड़गे के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया।

25 अक्टूबर को सामने आई इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए नित्यानंद राय ने आरोप लगाया कि लगातार चुनावी हार से निराश कांग्रेस नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार सहित पूरे देश की जनता राजनीतिक नेताओं के बयानों पर नजर रख रही है और प्रधानमंत्री के प्रति इस तरह की टिप्पणी स्वीकार नहीं करेगी।

नित्यानंद राय ने खड़गे के बयान को बताया लोकतंत्र के खिलाफ

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि पटना में कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी लोकतांत्रिक मूल्यों और सार्वजनिक जीवन की मर्यादा के अनुरूप नहीं थी। उन्होंने इस घटना को लोकतंत्र के लिए काला दिन बताते हुए खड़गे की कड़ी निंदा की।

उजियारपुर से लोकसभा सांसद और बिहार भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राय ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता चुनावी पराजयों से हताश होकर प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश के लोग ऐसे बयानों का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देंगे। हालांकि, चुनावी हार को बयान की वजह बताना नित्यानंद राय का राजनीतिक आरोप है, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य।

श्रीकृष्ण सिंह जयंती समारोह में कैसे शुरू हुआ विवाद?

यह विवाद पटना में श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के कार्यक्रम के दौरान खड़गे के संबोधन के बीच शुरू हुआ। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यक्रम में मौजूद एक व्यक्ति ने टिप्पणी की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहीं नहीं जाएंगे। इसके जवाब में खड़गे ने कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।” इसी टिप्पणी को लेकर भाजपा नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधा।

भाजपा ने खड़गे की भाषा को प्रधानमंत्री और उनके दिवंगत पिता के प्रति अपमानजनक बताते हुए विरोध जताया। नित्यानंद राय ने इसे कांग्रेस की राजनीतिक सोच से जोड़ते हुए पार्टी की आलोचना की। इस घटना ने बिहार में आयोजित एक जयंती समारोह को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का विषय बना दिया।

पवन खेड़ा ने किया बचाव, RSS को लेकर दी अलग व्याख्या

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने खड़गे का बचाव करते हुए घटना के दूसरे पक्ष को सामने रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में खड़गे के संबोधन के दौरान एक व्यक्ति ने उन्हें उकसाने वाली टिप्पणी की थी। खेड़ा ने इसे वरिष्ठ नेता के प्रति अनुचित व्यवहार बताया और उत्तराखंड में खड़गे से जुड़े कथित ‘शुद्धिकरण’ विवाद का भी उल्लेख किया।

पवन खेड़ा के अनुसार, खड़गे की टिप्पणी प्रधानमंत्री के वैचारिक मार्गदर्शक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसके प्रमुख मोहन भागवत की ओर संकेत करती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और संघ से जुड़े लोगों की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष का बार-बार अपमान किया जा रहा है। हालांकि, इस व्याख्या को कांग्रेस का पक्ष समझना चाहिए; इसे बयान के निर्विवाद अर्थ के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

इस घटनाक्रम ने भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है। एक तरफ भाजपा ने प्रधानमंत्री के खिलाफ टिप्पणी को अनुचित बताया है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने कार्यक्रम में हुई कथित हूटिंग और टिप्पणी के संदर्भ को सामने रखा है। पूरे विवाद को समझने के लिए दोनों पक्षों के बयानों और कार्यक्रम की परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।

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