Sengol बनाने वाले Vummidi Ethiraj का निधन, PM मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रसिद्ध शिल्पकार वुम्मिडी एथिराज (Vummidi Ethiraj) के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। एथिराज ऐतिहासिक सेंगोल (Sengol) को तैयार करने के प्रयासों के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। यह वही सेंगोल है, जिसे देश की आजादी के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सौंपा गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में कहा कि एथिराज का जीवन और उनकी शिल्पकला भारत की गौरवशाली परंपराओं तथा देश की ऐतिहासिक यात्रा के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री ने दिवंगत शिल्पकार के परिवार और उनके प्रशंसकों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की। उनके निधन से भारतीय पारंपरिक शिल्पकला और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व को खोने का दुख सामने आया है।
सेंगोल निर्माण में वुम्मिडी एथिराज का अहम योगदान
वुम्मिडी एथिराज का नाम ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण से जुड़ा रहा है। सेंगोल एक पारंपरिक राजदंड है, जिसे भारत के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के संदर्भ में विशेष महत्व दिया जाता है। इसका संबंध सत्ता के हस्तांतरण और शासन की जिम्मेदारी की परंपरा से जोड़ा जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि सेंगोल को तैयार करने में एथिराज के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी कारीगरी ने इस ऐतिहासिक प्रतीक को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सेंगोल केवल एक कलात्मक वस्तु नहीं है, बल्कि इसे भारत की परंपराओं और ऐतिहासिक स्मृतियों से जुड़े प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। इसके निर्माण से जुड़े शिल्पकारों का योगदान देश की सांस्कृतिक विरासत को समझने में अहम माना जाता है।
2023 में नए संसद भवन में मिला सेंगोल को विशेष स्थान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में वर्ष 2023 का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नए संसद भवन में सेंगोल को सम्मानजनक स्थान देने का अवसर एनडीए सरकार को मिला।
28 मई 2023 को नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान सेंगोल को लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास स्थापित किया गया था। इस अवसर पर सेंगोल को देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़कर प्रस्तुत किया गया।
सेंगोल को नए संसद भवन में स्थान मिलने के बाद यह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का प्रमुख विषय बना। इसके जरिए भारत की पारंपरिक शिल्पकला, इतिहास और सांस्कृतिक प्रतीकों पर भी ध्यान गया। इस पूरी प्रक्रिया में सेंगोल के निर्माण से जुड़े कारीगरों के योगदान को विशेष रूप से याद किया गया।
PM मोदी ने मुलाकात को किया याद, परिवार के प्रति जताई संवेदना
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में वुम्मिडी एथिराज से हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस मुलाकात के दौरान उन्होंने देश और भारतीय संस्कृति के लिए एथिराज के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया था।
प्रधानमंत्री के अनुसार, एथिराज का जीवन और उनकी शिल्पकला भारत की गौरवशाली परंपराओं तथा राष्ट्र की यात्रा के बीच एक अनूठा संबंध प्रस्तुत करती है। उनका काम इस बात का उदाहरण है कि पारंपरिक कारीगर देश की ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित रखने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मोदी ने दिवंगत शिल्पकार के परिवार और उनके चाहने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए इस कठिन समय में उन्हें शक्ति मिलने की कामना की।
वुम्मिडी एथिराज का योगदान सेंगोल के माध्यम से लंबे समय तक याद किया जाएगा। उनका निधन पारंपरिक शिल्पकला और भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े लोगों के लिए दुखद खबर है।

