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MLC चुनाव नतीजों पर संजय सरावगी का राहुल गांधी पर हमला, बोले- कांग्रेस का आधार कमजोर

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बिहार में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने विधान परिषद चुनाव के नतीजों को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि लगातार चुनावी झटकों के कारण कांग्रेस का राजनीतिक आधार कमजोर हो रहा है और जनता का भरोसा पार्टी से उठता जा रहा है। सरावगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया टिप्पणी का समर्थन करते हुए कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप भी लगाया।

29 अक्टूबर को पटना में समाचार एजेंसी ANI से बातचीत के दौरान संजय सरावगी ने कहा कि विधान परिषद के चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए थे। उनके मुताबिक, इन चुनावों में शिक्षित नागरिकों, शिक्षकों और सामाजिक रूप से जागरूक लोगों ने मतदान किया, फिर भी कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने इस प्रदर्शन को कांग्रेस की राजनीति के लिए झटका बताया। हालांकि, उनके बयान राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं और कांग्रेस के वास्तविक जनाधार का आकलन करने के लिए अलग-अलग चुनावों के आंकड़ों तथा अन्य परिस्थितियों को भी देखना जरूरी है।

बैलेट पेपर से चुनाव पर संजय सरावगी ने कांग्रेस को घेरा

संजय सरावगी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर सवाल उठाती रही है, लेकिन बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भी उसे चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावी नतीजों के संदर्भ में अपनी सुविधानुसार सवाल उठाती है।

उनकी यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस पोस्ट के बाद आई, जिसमें उन्होंने चार राज्यों में हुए विधान परिषद चुनावों का जिक्र करते हुए कांग्रेस की सीटों पर तंज कसा था। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पूछा था कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में बैलेट पेपर से हुए चुनावों में कांग्रेस को कितनी सीटें मिलीं।

प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी को कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देखा गया। वहीं, संजय सरावगी ने इसी मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए कहा कि चुनावी नतीजे कांग्रेस के दावों पर सवाल खड़े करते हैं।

राहुल गांधी के राजनीतिक आधार पर भी उठाए सवाल

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी का राजनीतिक आधार कमजोर पड़ रहा है और कांग्रेस तथा उसके सहयोगी दलों के प्रति लोगों का भरोसा घट रहा है।

सरावगी ने कांग्रेस के गठबंधन को अवसरवादी बताते हुए उसकी राजनीतिक रणनीति की आलोचना की। उनके मुताबिक, चुनावी परिणामों से विपक्षी दलों को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करने की जरूरत है।

हालांकि, राहुल गांधी के राजनीतिक प्रभाव या कांग्रेस के जनसमर्थन को लेकर सरावगी के दावे बीजेपी का पक्ष प्रस्तुत करते हैं। इन दावों की पुष्टि के लिए केवल कुछ विधान परिषद चुनावों के नतीजों को आधार बनाना पर्याप्त नहीं है। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों की लोकप्रियता और चुनाव की प्रकृति भी परिणामों को प्रभावित कर सकती है।

कर्नाटक और उत्तर प्रदेश के नतीजों से बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी

हालिया विधान परिषद चुनावों के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। कर्नाटक में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने चारों सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। इस नतीजे को प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर निशाना साधने के लिए इस्तेमाल किया।

दूसरी ओर, कांग्रेस नेता अजय राय ने उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजों को लेकर बीजेपी पर पलटवार किया। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी राजनीतिक रूप से घिर रही है। राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2024 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी से जीत को लेकर भी आरोप लगाए। उनके इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव में बीजेपी ने छह और समाजवादी पार्टी ने पांच सीटें जीती थीं। वाराणसी और आगरा की सीटों पर समाजवादी पार्टी को सफलता मिली। इन परिणामों को लेकर दोनों पक्ष अपनी-अपनी राजनीतिक व्याख्या पेश कर रहे हैं।

फिलहाल, विधान परिषद चुनावों के नतीजे बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी बहस का प्रमुख मुद्दा बने हुए हैं। बीजेपी इन्हें कांग्रेस की कमजोरी के संकेत के रूप में पेश कर रही है, जबकि विपक्षी नेता सत्तारूढ़ दल के प्रदर्शन पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन नतीजों का दोनों दलों की चुनावी रणनीति पर क्या असर पड़ता है।

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