शिवहर में पूजा पंडालों में पहुंचे रितेश कुमार, विजयदशमी पर दिया सौहार्द का संदेश
शिवहर में दुर्गा पूजा के अवसर पर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रदेश सचिव रितेश कुमार उर्फ आशुतोष राणा ने विभिन्न पूजा पंडालों में पहुंचकर मां भगवती की पूजा-अर्चना की। शिवहर में उनके इस धार्मिक दौरे के दौरान विजयदशमी पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाने का संदेश भी सामने आया। उन्होंने जिले के लोगों से आपसी भाईचारा बनाए रखने और त्योहार को मिल-जुलकर मनाने की अपील की।
शिवहर के पूजा पंडालों में पहुंचे रितेश कुमार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रदेश सचिव रितेश कुमार उर्फ आशुतोष राणा शिवहर शहर सहित जिले के कई पूजा पंडालों में पहुंचे। यहां उन्होंने मां भगवती के दर्शन किए और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की।
दुर्गा पूजा के दौरान पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखने को मिलता है। इस अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सामाजिक सद्भाव और आपसी सहयोग का संदेश भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
रितेश कुमार के पूजा पंडालों में पहुंचने की जानकारी स्थानीय समाचार इनपुट के माध्यम से सामने आई है। हालांकि, उनके दौरे में शामिल सभी पंडालों के नाम और कार्यक्रम का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध नहीं कराया गया है।
विजयदशमी पर जिलावासियों से की खास अपील
पूजा-अर्चना के बाद रितेश कुमार उर्फ आशुतोष राणा ने शिवहर के लोगों से विजयदशमी का पर्व शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने का अनुरोध किया। उन्होंने त्योहार के दौरान सामाजिक एकता, आपसी सम्मान और भाईचारे की भावना बनाए रखने पर जोर दिया।
विजयदशमी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानी जाती है। यह पर्व लोगों को सत्य, धर्म और सदाचार के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। ऐसे अवसर पर शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील सामाजिक दृष्टि से भी अहम होती है।
त्योहारों के दौरान अलग-अलग समुदायों और वर्गों के लोग एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हुए उत्सव में भाग लेते हैं। शांतिपूर्ण माहौल से श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना करने और धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने में सुविधा मिलती है।
मां भगवती की स्तुति कर लिया आशीर्वाद
रितेश कुमार उर्फ आशुतोष राणा ने मां भगवती की स्तुति के माध्यम से देवी की महिमा का स्मरण किया। उन्होंने देवी की वंदना में कहा:
जय भगवति देवि नमो वरदे, जय पापविनाशिनि बहुफलदे।
जय शुम्भनिशुम्भकपालधरे, प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे॥
यह स्तुति मां दुर्गा के शक्ति, कल्याण और भक्तों के कष्ट दूर करने वाले स्वरूप का वर्णन करती है। दुर्गा पूजा के दौरान देवी के विभिन्न रूपों की आराधना की जाती है और श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि तथा समाज के कल्याण की कामना करते हैं।
देवी की उपासना में आस्था के साथ-साथ धर्म, साहस और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा भी जुड़ी हुई है। यही कारण है कि नवरात्र और विजयदशमी का पर्व धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक महत्व भी रखता है।
मां नारायणी के कल्याणकारी स्वरूप का किया स्मरण
रितेश कुमार ने मां भगवती के मंगलकारी स्वरूप का वर्णन करते हुए देवी को सभी प्रकार का कल्याण करने वाली और शरण में आने वाले भक्तों की रक्षा करने वाली बताया।
उन्होंने मां नारायणी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके गौरी स्वरूप और तीन नेत्रों वाली देवी की वंदना की। देवी की इस स्तुति में भक्तों के कल्याण, पुरुषार्थ की सिद्धि और संकटों से रक्षा की भावना निहित है।
दुर्गा पूजा के दौरान मां के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना श्रद्धालुओं को शक्ति, भक्ति और सकारात्मकता का संदेश देती है। पूजा पंडालों में होने वाले धार्मिक आयोजन इसी आस्था को सामूहिक रूप से अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान करते हैं।
दुर्गा पूजा में शांति और सामाजिक सद्भाव का महत्व
दुर्गा पूजा बिहार सहित देश के कई हिस्सों में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। इस दौरान मंदिरों और पूजा पंडालों में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन और अन्य धार्मिक आयोजन भी होते हैं।
ऐसे आयोजनों में शांति और व्यवस्था बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी होती है। आयोजकों, श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से त्योहार का वातावरण बेहतर बनाया जा सकता है।
विजयदशमी का संदेश केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत, अहंकार पर संयम और अन्याय पर न्याय की विजय का भी प्रतीक है। इसलिए त्योहार को आपसी सद्भाव के साथ मनाने की अपील का विशेष महत्व है।
शिवहर में धार्मिक आस्था के साथ भाईचारे का संदेश
रितेश कुमार उर्फ आशुतोष राणा का शिवहर शहर और जिले के विभिन्न पूजा पंडालों में पहुंचकर मां भगवती की पूजा करना दुर्गा पूजा के धार्मिक माहौल से जुड़ा कार्यक्रम रहा। इस अवसर पर उन्होंने जिलावासियों को विजयदशमी शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से मनाने का संदेश दिया।
त्योहार के मौके पर ऐसी अपील लोगों को सामाजिक एकता और पारस्परिक सम्मान की याद दिलाती है। दुर्गा पूजा और विजयदशमी का उत्सव तभी अधिक सार्थक बनता है, जब लोग धार्मिक उत्साह के साथ शांति, सहयोग और भाईचारे की भावना को भी प्राथमिकता दें।

