अखिलेश यादव का BJP पर बड़ा हमला, चुनाव आयोग और प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा, चुनाव आयोग और प्रशासन के बीच कथित मिलीभगत से चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। अखिलेश ने इस व्यवस्था को चुनावी अनियमितताओं का तीन स्तरीय तरीका बताते हुए भाजपा को ‘इलेक्टोरल सिंडिकेट’ करार दिया।
अखिलेश यादव के ये बयान ऐसे समय में आए हैं, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने और मतदान के अधिकार प्रभावित होने की आशंकाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। हालांकि, अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जानकारी में नहीं दी गई है।
अखिलेश यादव ने चुनावी प्रक्रिया पर क्या आरोप लगाए?
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए भाजपा, चुनाव आयोग और प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित चुनावी गड़बड़ियों की शुरुआत मतदान से पहले ही मतदाता सूची में बदलाव के माध्यम से हो सकती है।
सपा प्रमुख के मुताबिक, चुनाव से पहले मतदाता सूची में कथित छेड़छाड़, मतदान के दौरान फर्जी वोटिंग और विपक्षी समर्थकों को वोट डालने से रोकने जैसी गतिविधियां चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में नाम का मिलान नहीं होने या मतदाताओं को डराने जैसे कारणों का हवाला देकर विपक्ष के मतदाताओं को परेशान किया जा सकता है।
अखिलेश ने मतगणना और परिणामों में कथित हेरफेर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने इन सभी आरोपों को एक साथ जोड़ते हुए भाजपा पर चुनावी व्यवस्था का अनुचित लाभ लेने का आरोप लगाया। हालांकि, इन दावों के समर्थन में पोस्ट में किसी विशेष चुनाव या घटना के विस्तृत प्रमाण का उल्लेख नहीं किया गया।
SIR और वोटर लिस्ट को लेकर विपक्ष का विरोध तेज
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों का विरोध लगातार चर्चा में है। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की आशंकाओं पर चिंता जताई है और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।
इस बीच, कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 30 अक्टूबर को महाभियोग जैसी सार्वजनिक कार्यवाही आयोजित करने की योजना की घोषणा की है। इसके बाद एक नवंबर को ‘दिल्ली चलो’ मार्च और रामलीला मैदान में जनसभा प्रस्तावित है। ये कार्यक्रम विपक्ष के चुनावी अनियमितताओं संबंधी विरोध अभियान का हिस्सा बताए गए हैं।
कांग्रेस की ओर से प्रस्तावित कार्यक्रमों के जरिए चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाने और मतदाता अधिकारों का मुद्दा उठाने की तैयारी है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों में जवाबदेही जरूरी है।
राहुल गांधी ने भी उठाया वोट चोरी का मुद्दा
इसी दिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। नई दिल्ली के त्रिलोकपुरी ब्लॉक-20 में आयोजित ‘वोट अधिकार जीने का अधिकार’ जनसुनवाई में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देशभर में लोगों के मतदान के अधिकार को प्रभावित किया जा रहा है और गरीब मतदाताओं के नाम जानबूझकर सूची से हटाए जा रहे हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट है और उसका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मांग की कि ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें पद से हटाएं। उनके अनुसार, मतदान का अधिकार प्रत्येक भारतीय नागरिक का बुनियादी अधिकार है और इसकी रक्षा की जानी चाहिए।
अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बयानों से स्पष्ट है कि मतदाता सूची, SIR और चुनावी पारदर्शिता विपक्ष के प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बने हुए हैं। अब इस विवाद में चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया तथा आरोपों की तथ्यात्मक जांच अहम होगी।

