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बिहार-UP MLC चुनाव में घमासान, 19 सीटों पर बागियों ने बढ़ाई सियासी चुनौती

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बिहार और उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधान परिषद की 19 सीटों को लेकर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। 27 अक्टूबर 2026 को सामने आई ANI की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों राज्यों की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों पर बहुकोणीय मुकाबले, टिकट बंटवारे से नाराजगी और दलों के भीतर बगावत ने चुनावी समीकरणों को उलझा दिया है। इन सीटों के नतीजे राजनीतिक दलों की संगठनात्मक ताकत और विपक्षी एकजुटता का भी संकेत दे सकते हैं।

बिहार में आठ और उत्तर प्रदेश में 11 सीटों पर चुनावी गतिविधियां केंद्र में हैं। बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सामने जन सुराज पार्टी की चुनौती है, जबकि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच मुकाबला प्रमुख रूप से देखा जा रहा है।

बिहार की 8 MLC सीटों पर NDA और विपक्ष के बीच कड़ा मुकाबला

बिहार की आठ सीटों में चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। स्नातक सीटों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी शामिल हैं। वहीं, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण की सीटें हैं। मौजूदा आठ विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल 16 नवंबर को समाप्त होने वाला है।

सत्तारूढ़ NDA ने इन सीटों पर BJP और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बीच बराबर बंटवारा किया है। BJP ने चार और JDU ने चार सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। BJP के प्रमुख उम्मीदवारों में पटना शिक्षक सीट से नवल किशोर यादव, कोसी स्नातक सीट से एनके यादव और तिरहुत स्नातक सीट से सर्वेश कुमार शामिल हैं। तिरहुत शिक्षक सीट से नरेंद्र कुमार सिंह भी चुनावी मैदान में हैं।

दूसरी ओर, विपक्षी दलों के बीच सीटों को लेकर पूरी एकजुटता नजर नहीं आ रही है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) छह सीटों पर, कांग्रेस पांच सीटों पर और CPI एक सीट पर चुनाव लड़ रही है। कई जगहों पर अलग-अलग विपक्षी उम्मीदवारों की मौजूदगी मुकाबले को और जटिल बना रही है।

पटना स्नातक सीट पर नीतीश कुमार के करीबी और जन सुराज आमने-सामने

बिहार की पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट खास चर्चा में है। यहां JDU के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नीरज कुमार लगातार चौथी बार जीत हासिल करने की कोशिश में हैं। उन्हें मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है।

हालांकि, इस सीट पर जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, JDU से निष्कासित नेता और मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने अपनी पार्टी के उम्मीदवार के बजाय जन सुराज प्रत्याशी का समर्थन किया। इसके बाद JDU ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।

अनंत सिंह ने इस कार्रवाई के बाद JDU के राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठाए और अपनी अलग पार्टी बनाने की योजना का ऐलान किया। इस घटनाक्रम ने बिहार की चुनावी राजनीति में आंतरिक असंतोष और पार्टी अनुशासन को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बिहार की सभी आठ सीटों पर उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की है। पार्टी ने प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में जीतने वाले उम्मीदवार के माध्यम से 10,000 स्थानीय नौकरियां उपलब्ध कराने का वादा भी किया है। पार्टी ने कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवारों में बदलाव भी किया है।

उत्तर प्रदेश की 11 सीटों पर BJP-SP की प्रतिष्ठा दांव पर

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर मुकाबला राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इनमें लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी की पांच स्नातक सीटें शामिल हैं। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद की छह सीटें हैं।

BJP ने सभी 11 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। प्रमुख उम्मीदवारों में वाराणसी स्नातक सीट से केदारनाथ सिंह, मेरठ स्नातक सीट से दिनेश गोयल, इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट से अशोक कुमार राठौर और वाराणसी शिक्षक सीट से डॉ. प्रमोद मिश्रा शामिल हैं।

समाजवादी पार्टी ने BJP के भीतर टिकट वितरण से नाराज नेताओं को अपने पक्ष में करने की रणनीति अपनाई है। रिपोर्ट के अनुसार, गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से डॉ. संजय त्रिपाठी और आगरा सीट से आकाश अग्रवाल जैसे पूर्व BJP टिकट दावेदारों को SP ने मैदान में उतारा है। वाराणसी स्नातक सीट पर केदारनाथ सिंह के सामने SP के आशुतोष सिन्हा चुनौती पेश कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, बिहार और उत्तर प्रदेश की 19 MLC सीटों का मुकाबला केवल विधान परिषद में प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है। यह चुनाव दलों के भीतर असंतोष, गठबंधन की मजबूती और नए राजनीतिक विकल्पों की स्वीकार्यता को परखने का अवसर भी है। हालांकि, इन नतीजों से विधानसभा चुनावों की दिशा का अंतिम अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।

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