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गुजरात में गरबा की एंट्री पर विवाद, मुस्लिमों को बाहर करने की मांग से हलचल

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गुजरात में गरबा विवाद नवरात्रि के दौरान चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। गरबा विवाद की वजह अलग-अलग आयोजनों में मुस्लिमों और दूसरे धर्मों के लोगों की एंट्री पर उठ रहे सवाल, पहचान पत्रों को लेकर शिकायतें और धार्मिक संगठनों की मांगें हैं। अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और भावनगर से जुड़ी घटनाओं के बाद पुलिस को कई शिकायतें मिली हैं। कुछ आयोजक धार्मिक आधार पर प्रवेश सीमित रखने की बात कह रहे हैं, जबकि कुछ मामलों में पहचान और आयोजन से जुड़े नियमों की जांच की जा रही है।

इस विवाद ने गरबा जैसे लोकप्रिय सांस्कृतिक उत्सव में धार्मिक पहचान, आयोजकों के अधिकार, सुरक्षा और सार्वजनिक आयोजनों में समान व्यवहार को लेकर बहस तेज कर दी है। हालांकि, अलग-अलग घटनाओं में लगाए गए आरोपों और पुलिस जांच के निष्कर्षों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

आदित्य गढ़वी के कार्यक्रम में मंच से क्या कहा गया?

14 अक्टूबर को गुजरात में ‘रंग मोरलो’ नाम से आयोजित नवरात्रि कार्यक्रम के दौरान मंच से की गई एक घोषणा विवाद का कारण बनी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एंकर ने कथित तौर पर कहा कि ‘विधर्मी’ या मुस्लिम लोग मैदान से बाहर चले जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि विश्व हिंदू परिषद (विहिप) हिंदुओं की सुरक्षा के लिए वहां मौजूद है। इस दौरान एक हेल्पलाइन नंबर भी साझा किया गया।

यह कार्यक्रम लोक गायक आदित्य गढ़वी से जुड़ा था। विवाद सामने आने के बाद गढ़वी ने खुद को इस घोषणा से अलग बताया। उनका कहना था कि कुछ लोगों ने बैकस्टेज पर कब्जा कर लिया था और न तो उनसे और न ही एंकर से इस बारे में सलाह ली गई थी।

वहीं, एंकर आकाश त्रिवेदी ने कहा कि उन्होंने आयोजकों की ओर से बात कही थी और यह उनकी निजी राय नहीं थी। इस घटना पर अहमदाबाद ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश जाट के अनुसार, पुलिस को कार्यक्रम के आयोजकों की ओर से आवेदन मिला है और मामले की जांच की जा रही है।

वडोदरा में पहचान पत्र को लेकर शिकायत

16 अक्टूबर को वडोदरा के चर्चित ‘यूनाइटेड वे ऑफ बड़ौदा’ गरबा आयोजन में भी पहचान पत्र को लेकर विवाद सामने आया। विहिप ने आरोप लगाया कि प्रवेश पास स्कैन करने वाली टीम में शामिल रज्जाक पठान के पास मौजूद इवेंट आईडी कार्ड पर ‘आयुष पटेल’ नाम लिखा था।

संगठन ने इस मामले में अतलादरा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में पहचान दस्तावेज और आयोजन स्थल पर इस्तेमाल किए जा रहे आईडी कार्ड के नाम में अंतर का मुद्दा उठाया गया।

पुलिस के मुताबिक, रज्जाक उस टीम में शामिल थे जो प्रवेश द्वार पर पास स्कैन कर रही थी। यह भी संभावना जताई गई कि इवेंट आईडी कार्ड उन्हें किसी एजेंसी ने जारी किया हो। आयोजन से जुड़े सदस्यों ने कहा कि संगठन ने सीधे किसी कर्मचारी को नियुक्त नहीं किया था और संभव है कि किसी सब-वेंडर ने उन्हें काम पर रखा हो।

पुलिस इंस्पेक्टर पीयू पास्तागिया ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की गई है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर होगी। फिलहाल, शिकायत में लगाए गए आरोपों को जांच का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

‘बिना तिलक के एंट्री नहीं’ के बोर्ड पर भी चर्चा

वडोदरा के नवलखी मैदान में आयोजित गरबा महोत्सव में प्रवेश से जुड़े बोर्ड लगाए जाने की भी खबर सामने आई। इन बोर्डों पर कथित तौर पर लिखा था—‘बिना तिलक के एंट्री नहीं’। इस नियम को लेकर धार्मिक पहचान और आयोजनों में प्रवेश की शर्तों पर चर्चा शुरू हुई।

इसी दिन ग्रामीण सूरत के ओलपाड क्षेत्र में किरण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के गरबा आयोजन के दौरान विहिप कार्यकर्ताओं और स्टाफ के बीच तीखी बहस का वीडियो वायरल हुआ। ओलपाड पुलिस के इंस्पेक्टर सीआर जाधव के अनुसार, पुलिस ने आयोजकों से कहा कि यदि कोई व्यक्ति लोगों को परेशान करता है या गैर-कानूनी गतिविधि करता है, तो इसकी सूचना पुलिस को दी जाए। कॉलेज से जुड़े लोगों ने घटना की जानकारी होने से इनकार किया।

इन घटनाओं में अलग-अलग आयोजकों की भूमिका और प्रवेश संबंधी नियमों को अलग-अलग देखना जरूरी है। किसी एक आयोजन की शर्त को पूरे गुजरात के सभी गरबा आयोजनों का नियम नहीं माना जा सकता।

सूरत में आयोजकों ने मुस्लिमों की भागीदारी पर क्या कहा?

सूरत में ‘रासलोक नवरात्रि’ के आयोजकों हर्षल मिस्त्री और मिमेश मिस्त्री ने सितंबर में कथित तौर पर कहा था कि वे आयोजन में मुस्लिमों को शामिल नहीं होने देंगे। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने संगीत, सुरक्षा और कार्यक्रम से जुड़े दूसरे कामों में भी मुस्लिम कर्मचारियों को न रखने की बात कही थी।

इस बयान ने आयोजन में भागीदारी के साथ-साथ रोजगार और धार्मिक पहचान के सवाल भी खड़े किए। हालांकि, किसी आयोजक के बयान और प्रशासन की ओर से लागू नियमों के बीच अंतर होता है। किसी विशेष आयोजन की प्रवेश नीति की वैधता का सवाल उसके तथ्यों और लागू कानूनों के आधार पर देखा जाना चाहिए।

भावनगर में मुस्लिम संगीतकारों को काम देने का विरोध

13 अक्टूबर को भावनगर के वरतेज इलाके में ‘रंगोली पार्टी प्लॉट’ पर आयोजित डांडिया कार्यक्रम में मुस्लिम संगीतकारों को काम पर रखने का विरोध हुआ। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद (एएचपी) और अन्य समूहों के 40 से अधिक सदस्यों को पुलिस ने हिरासत में लिया।

भावनगर के पुलिस अधीक्षक नितेश पांडे ने बताया कि आयोजक की ओर से विरोध करने वाले लोगों के खिलाफ आवेदन दिया गया था। पुलिस ने संबंधित लोगों की पहचान कर उचित एहतियाती कार्रवाई शुरू की।

इस घटना में मुख्य विवाद मुस्लिम संगीतकारों की नियुक्ति को लेकर था। यह मामला दिखाता है कि गरबा विवाद केवल दर्शकों के प्रवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्यक्रमों में काम करने वाले कलाकारों और कर्मचारियों तक भी पहुंच गया है।

विहिप और बजरंग दल की मांग, पुलिस की प्राथमिकता क्या है?

विहिप और बजरंग दल जैसे संगठनों ने कुछ गरबा आयोजनों में गैर-हिंदुओं की मौजूदगी पर आपत्ति जताई है। इन संगठनों ने पुलिस को ज्ञापन देकर ऐसे आयोजनों से गैर-हिंदुओं को दूर रखने की मांग भी की है। बजरंग दल ने सोशल मीडिया पर यह दावा भी किया कि कुछ लोग कथित तौर पर हिंदू जैसे नामों का इस्तेमाल कर गरबा पंडालों में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे दावों की पुष्टि संबंधित मामलों के तथ्यों से ही हो सकती है।

अहमदाबाद शहर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त जयपाल सिंह राठौर के अनुसार, संबंधित मामलों को स्थानीय पुलिस थानों के स्तर पर संभालने की व्यवस्था है। पुलिस की प्राथमिकता नवरात्रि के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।

गरबा को 2023 में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया था। यह गुजरात की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा उत्सव है, जिसमें संगीत, नृत्य और सामुदायिक भागीदारी अहम भूमिका निभाते हैं।

गरबा विवाद में आगे क्या होगा?

गुजरात में गरबा आयोजनों से जुड़े मामलों में पुलिस शिकायतों की जांच कर रही है। अलग-अलग घटनाओं में पहचान पत्र, प्रवेश की शर्तों, कर्मचारियों की नियुक्ति और विरोध प्रदर्शनों से संबंधित सवाल उठे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही संबंधित आरोपों पर स्थिति स्पष्ट होगी।

इस विवाद का व्यापक सवाल यह है कि धार्मिक परंपराओं और आयोजकों के नियमों के साथ कानून-व्यवस्था, नागरिक अधिकारों और शांतिपूर्ण भागीदारी के बीच संतुलन कैसे रखा जाए। नवरात्रि जैसे बड़े उत्सव में किसी भी विवाद का समाधान तथ्यों, लागू कानूनों और प्रशासनिक प्रक्रिया के आधार पर होना महत्वपूर्ण है।

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