UN Day 2026: जयशंकर ने दोहराई भारत की प्रतिबद्धता, मेजर अभिलाषा बराक को मिला सम्मान
नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर भारत ने अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार, 24 अक्टूबर को कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र और उसके चार्टर के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश साझा करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से भारत अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा, देशों के बीच सहयोग तथा ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए काम करता रहेगा। इसी अवसर पर उन्होंने भारतीय सेना की मेजर अभिलाषा बराक को संयुक्त राष्ट्र की ओर से मिले विशेष सम्मान का भी उल्लेख किया।
यह सम्मान संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में महिलाओं की भूमिका और सैन्य कार्यों में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के प्रयासों को रेखांकित करता है।
संयुक्त राष्ट्र दिवस पर भारत ने बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार पर दिया जोर
हर साल 24 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र दिवस मनाया जाता है। इसी दिन 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर लागू हुआ था, जिसके साथ संयुक्त राष्ट्र संगठन ने औपचारिक रूप से काम करना शुरू किया। इस दिवस का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति, सहयोग और वैश्विक समस्याओं के समाधान में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को रेखांकित करना है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार जरूरी है। भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में व्यापक प्रतिनिधित्व और विकासशील देशों की आवाज को अधिक महत्व देने की मांग करता रहा है।
ग्लोबल साउथ में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई विकासशील देश शामिल हैं। भारत इन देशों की विकास संबंधी प्राथमिकताओं, आर्थिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी को महत्वपूर्ण मानता है। जयशंकर के संदेश में भी वैश्विक सहयोग और इन देशों की आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
मेजर अभिलाषा बराक को मिला UN का 2026 का सम्मान
संयुक्त राष्ट्र दिवस पर जयशंकर ने भारतीय सैन्य अधिकारी मेजर अभिलाषा बराक की उपलब्धि का भी जिक्र किया। उन्हें 2026 के लिए संयुक्त राष्ट्र मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में लैंगिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने और महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने के प्रयासों के लिए दिया जाता है।
संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भारतीय कर्मियों की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। ऐसे अभियानों में सैन्य कर्मी संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापना, सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े कार्यों में योगदान देते हैं। मेजर बराक को मिला सम्मान इन अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में भारतीय महिला सैन्य अधिकारियों के योगदान को भी सामने लाता है।
यह उपलब्धि संयुक्त राष्ट्र मिशनों में महिलाओं की भूमिका को व्यापक बनाने और सैन्य नेतृत्व में समान अवसरों को प्रोत्साहित करने के महत्व को दर्शाती है।
परमाणु तकनीक और विकास सहयोग में भी भारत की सक्रिय भूमिका
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत ने परमाणु विज्ञान और तकनीक के सुरक्षित, संरक्षित तथा शांतिपूर्ण उपयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की सदस्य और नेता संगीता कुमारी सिंह देव ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान एजेंसी के योगदान को रेखांकित किया।
उन्होंने क्षमता निर्माण, सतत विकास और परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण इस्तेमाल में IAEA की भूमिका पर जोर दिया। परमाणु तकनीक का उपयोग ऊर्जा उत्पादन, चिकित्सा, कृषि और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में भी किया जाता है।
इसके अलावा, 22 अक्टूबर को आयोजित भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के नौवें वार्षिक कार्यक्रम में कई देशों के प्रतिनिधियों ने भारत के विकास सहयोग की सराहना की। लाओस, श्रीलंका, तंजानिया, मोल्दोवा, मोरक्को और मोजाम्बिक के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप सतत विकास परियोजनाओं में इस कोष के योगदान को रेखांकित किया।
कुल मिलाकर, संयुक्त राष्ट्र दिवस पर भारत का संदेश अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार, शांति स्थापना, विकासशील देशों के हितों और तकनीक के शांतिपूर्ण उपयोग पर केंद्रित रहा।

