भूटान में ग्लेशियर झील फटने से भारत में अलर्ट, असम-बंगाल में बाढ़ का खतरा; NDRF तैयार
भूटान में ग्लेशियर झील फटने की घटना के बाद भारत के सीमावर्ती राज्यों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। इस घटना से असम और पश्चिम बंगाल के कुछ निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आने की आशंका जताई गई है। हालांकि, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के महानिदेशक पीयूष आनंद ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि फिलहाल भारत में चिंता की कोई बड़ी वजह सामने नहीं आई है। इसके बावजूद बचाव दलों को अलर्ट पर रखा गया है और संबंधित एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए NDRF महानिदेशक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर सभी संबंधित विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। इस अभियान में केंद्रीय जल आयोग (CWC), भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखी है। फिलहाल उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से सतर्कता बरती जा रही है।
भूटान की सिंटाफू झील में GLOF, नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका
दरअसल, भूटान के गासा जिले में स्थित सिंटाफू झील से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की खबर सामने आई है। यह ऐसी प्राकृतिक घटना है, जिसमें ग्लेशियर से बनी झील का पानी अचानक बड़ी मात्रा में बाहर निकल जाता है। इससे नीचे बहने वाली नदियों में तेजी से जलस्तर बढ़ सकता है और आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है।
केंद्रीय जल आयोग ने 29 अक्टूबर को विशेष बाढ़ सलाह जारी की थी। इसमें बताया गया कि भूटान स्थित भारतीय दूतावास से झील के पानी के बाहर निकलने की सूचना मिली है। आयोग ने चेतावनी दी कि पुनाৎসांगछू नदी के ऊपरी हिस्से में अचानक पानी बढ़ने से भारत में संकोश नदी का जलस्तर प्रभावित हो सकता है।
भूटान में इसी नदी को पुनाৎসांगछू के नाम से जाना जाता है, जबकि भारत में यह संकोश नदी कहलाती है। सिंटाफू झील का पानी मो छू नदी में पहुंचता है। आगे चलकर मो छू और फो छू नदियां पुनाखा में मिलती हैं और पुनाৎসांगछू नदी बनाती हैं, जो भारत में प्रवेश करने के बाद संकोश कहलाती है।
भूटान की स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 29 अक्टूबर की शाम आई बाढ़ से गासा जिले में मो छू नदी के किनारे स्थित गासा त्साचू हॉट स्प्रिंग परिसर को नुकसान पहुंचा। पुनाखा-गासा सड़क का एक हिस्सा भी बह गया, जिसके बाद प्रशासन ने अगले आदेश तक इस मार्ग पर यातायात बंद कर दिया। संभावित खतरे वाले स्थानों से लोगों को सुरक्षित निकालने की कार्रवाई भी की गई। 30 अक्टूबर की सुबह तक किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं थी।
असम और पश्चिम बंगाल में प्रशासन हाई अलर्ट पर
भूटान में हुई घटना के बाद असम और पश्चिम बंगाल में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। केंद्रीय जल आयोग ने असम के धुबरी और पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि धुबरी और कोकराझार जिलों के संवेदनशील राजस्व क्षेत्रों में संभावित प्रभाव पर नजर रखी जा रही है। राज्य की टीमें NDRF और दूसरी संबंधित एजेंसियों के संपर्क में हैं। उन्होंने लोगों से आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की।
पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री डॉ. शंकर घोष ने भी कहा कि प्रशासन किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। अलीपुरद्वार में किसी बड़ी तबाही की सूचना नहीं मिली है, लेकिन लोगों की सुरक्षा के लिए एहतियाती निर्देश जारी किए गए हैं।
NDRF ने अपने शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि
इस बीच 30 अक्टूबर को NDRF दिवस के अवसर पर महानिदेशक पीयूष आनंद ने ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले बल के 17 शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। इस कार्यक्रम में शहीदों के परिवारों को भी सम्मानित किया गया।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के सुझाव के बाद प्रत्येक सुरक्षा बल के लिए अलग स्मृति दिवस निर्धारित करने की पहल की गई थी। इसी क्रम में 30 अक्टूबर को NDRF दिवस के रूप में चुना गया।
फिलहाल भूटान की झील से निकले पानी के संभावित प्रभाव को लेकर भारत की एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं। प्रशासन की प्राथमिकता संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव अभियान चलाना है।

