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जेल से बाहर आते ही कार्तिका का CM विजय पर हमला, बोलीं- तमिलनाडु की बुरी शक्ति

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तमिलनाडु की राजनीति में शुक्रवार, 23 अक्टूबर को उस समय हलचल तेज हो गई, जब नाम तमिलर काची (NTK) की नेता और धारापुरम चुनाव की उम्मीदवार एम. कार्तिका जमानत पर कोयंबटूर सेंट्रल जेल से बाहर आईं। जेल से निकलते ही उन्होंने मुख्यमंत्री विजय पर तीखा हमला बोला और उनकी सरकार की कार्यशैली को असंवैधानिक करार दिया। कार्तिका ने मुख्यमंत्री को राज्य की कथित ‘बुरी शक्ति’ तक कह दिया।

कार्तिका की रिहाई के मौके पर जेल के बाहर NTK समर्थकों की बड़ी भीड़ मौजूद थी। पार्टी के झंडे लेकर पहुंचे कार्यकर्ताओं ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। समर्थकों ने नारे लगाए और ढोल-नगाड़ों के बीच अपनी नेता के प्रति समर्थन जताया। भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात सुचारु रखने के लिए पुलिस ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की थी।

जमानत पर बाहर आते ही मुख्यमंत्री विजय पर साधा निशाना

जेल से बाहर आने के बाद समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में एम. कार्तिका ने कहा कि चुनाव उम्मीदवार के रूप में प्रचार करना और लोगों से वोट मांगना उनका लोकतांत्रिक तथा संवैधानिक अधिकार है। उनके मुताबिक, वह केवल अपनी पार्टी के लिए प्रचार कर रही थीं और इसी जिम्मेदारी के तहत जनता के बीच जा रही थीं।

कार्तिका ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री विजय और उनकी पार्टी धारापुरम विधानसभा क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की भावना के विपरीत बताया। कार्तिका ने कहा कि उनकी लड़ाई इसी कथित राजनीतिक दबाव के खिलाफ है।

उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि तमिलनाडु में बुरी शक्ति कोई और नहीं, बल्कि खुद मुख्यमंत्री विजय हैं। यह बयान राज्य की राजनीति में चल रही खींचतान को और तेज कर सकता है। हालांकि, मुख्यमंत्री के खिलाफ लगाए गए ये आरोप कार्तिका के राजनीतिक दावे हैं; इस संबंध में सरकार का पक्ष खबर में उपलब्ध नहीं है।

चुनाव प्रचार के दौरान प्रदर्शन के मामले में हुई थी गिरफ्तारी

एम. कार्तिका को धारापुरम विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान हुए एक प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में उनके पति और पार्टी के कुछ अन्य कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया था। इसके बाद कार्तिका को न्यायिक हिरासत में रखा गया और बाद में उन्हें जमानत मिल गई।

कार्तिका का कहना है कि वह एक चुनाव उम्मीदवार के तौर पर अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर रही थीं। उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी उम्मीदवारों को राजनीतिक गतिविधियां करने से रोकने की कोशिश की जा रही है।

उनके बयान से साफ है कि वह इस मामले को केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं मान रही हैं, बल्कि इसे चुनाव प्रचार की स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकारों से जोड़कर देख रही हैं। हालांकि, गिरफ्तारी के कानूनी आधार, पुलिस के विस्तृत पक्ष और अदालत के जमानत आदेश की शर्तों से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान, जेल के बाहर समर्थकों की भीड़

रिहाई के बाद कार्तिका ने कहा कि वह मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ अपना राजनीतिक विरोध जारी रखेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह जनता के मुद्दों को लेकर मैदान में बनी रहेंगी और अपनी लड़ाई पीछे नहीं हटाएंगी।

उनकी रिहाई के दौरान कोयंबटूर सेंट्रल जेल के बाहर बड़ी संख्या में NTK कार्यकर्ता जमा हुए थे। समर्थकों के स्वागत और नारों के बीच पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी। वाहनों की आवाजाही प्रभावित न हो, इसके लिए जेल परिसर के आसपास सुरक्षा प्रबंध किए गए।

इस घटनाक्रम ने धारापुरम चुनाव से जुड़े विवाद को नया राजनीतिक मोड़ दिया है। एक ओर कार्तिका अपनी गिरफ्तारी को अधिकारों के उल्लंघन से जोड़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर इस मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। आने वाले दिनों में कार्तिका के अगले कदम और मुख्यमंत्री विजय की ओर से संभावित प्रतिक्रिया पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।

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